Nitin Gadkari speech: केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को नागपुर स्थित विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (VNIT) में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “दुनिया झुकती है, बस झुकाने वाला चाहिए।” उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत को लेकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों में नया तनाव देखा जा रहा है।
गडकरी ने कहा कि भारत को अगर “विश्वगुरु” बनना है, तो सबसे पहले इंपोर्ट को कम और एक्सपोर्ट को बढ़ाना होगा। उन्होंने इसे सबसे बड़ी राष्ट्रभक्ति बताया। उन्होंने कहा, “हमारे पास टेक्नोलॉजी, नॉलेज और साइंस की ताकत है, अगर उसका सही उपयोग करें, तो दुनिया के सामने झुकना नहीं पड़ेगा।”
गडकरी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और चुनावी दावेदार डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25% अतिरिक्त आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने की घोषणा की है। इसके साथ ही भारत पर कुल 50% टैरिफ लग जाएगा। ट्रंप ने हाल ही में एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन करते हुए यह कदम उठाया। इस पृष्ठभूमि में गडकरी की टिप्पणी को भारत के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
गडकरी ने कहा, “आज दुनिया में कुछ देश आर्थिक रूप से मजबूत होकर दादागिरी कर रहे हैं। हमारे पास अगर उनसे बेहतर टेक्नोलॉजी और संसाधन होंगे, तो हमें किसी पर दबाव बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हमारी संस्कृति ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की है। हम सबका कल्याण चाहते हैं, न कि केवल अपना।” उन्होंने आगे कहा कि भारत को हर जिले और क्षेत्र के संसाधनों के अनुसार टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में इनोवेशन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि, “जहां ज्यादा कचरा है, वहां उस कचरे से ऊर्जा पैदा की जा सकती है। अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग समस्याओं का समाधान साइंस और टेक्नोलॉजी से निकलेगा।”
कार्यक्रम में उपस्थित छात्रों और वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उद्योगों, स्टार्टअप्स और वैज्ञानिक संस्थानों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा, “देश की प्रगति केवल सरकारी योजनाओं से नहीं होगी, बल्कि इनोवेशन और लोकल समाधान से होगी। हमारी ग्रोथ रेट तीन गुना हो सकती है, अगर हम टेक्नोलॉजी और रिसोर्स का सही इस्तेमाल करें।”
गडकरी के इस बयान को केवल एक राजनीतिक वक्तव्य नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की भूमिका को दोहराने वाला रणनीतिक संदेश माना जा रहा है। अमेरिका द्वारा आयात शुल्क बढ़ाने के बाद भारत की आर्थिक नीतियों और वैश्विक व्यापार में उसका रुख अब और भी अहम हो गया है।उनकी बातों का सार यही था — “अगर भारत को झुकना नहीं है, तो उसे झुकाने वाला बनना होगा। और इसके लिए टेक्नोलॉजी, आत्मनिर्भरता और एक्सपोर्ट आधारित अर्थव्यवस्था ही रास्ता है।”
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