Illegal Coal Mining
Illegal Coal Mining: छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में प्रकृति की अनमोल संपदा ‘काले सोने’ (कोयले) की अवैध लूट के खिलाफ प्रशासन ने मोर्चा खोल दिया है। रायपुर से पहुंची सेंट्रल फ्लाइंग स्क्वॉड और स्थानीय टास्क फोर्स की संयुक्त टीम ने लगातार दूसरे दिन छापेमारी कर अवैध खनन के सिंडिकेट को बड़ा झटका दिया है। मीडिया में खबर प्रमुखता से आने के बाद सक्रिय हुए प्रशासन ने अब इन अवैध खदानों को स्थायी रूप से जमींदोज करने की योजना बनाई है।
रविवार को राजधानी रायपुर से विशेष रूप से पहुंची सेंट्रल फ्लाइंग स्क्वॉड की टीम ने कोरिया के देवखोल और भालूमाड़ा क्षेत्रों का सघन निरीक्षण किया। टीम ने उन दुर्गम स्थलों का बारीकी से मुआयना किया, जहां माफियाओं द्वारा अवैध रूप से कोयला निकाला जा रहा था। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने उन सभी संवेदनशील पॉइंट्स को चिन्हित किया, जहां से सुरंगें बनाकर जंगल की जमीन को खोखला किया जा रहा था। टीम ने सख्त लहजे में निर्देश दिए हैं कि इन सभी स्थलों को ब्लास्टिंग के जरिए स्थायी रूप से बंद किया जाए ताकि अपराधी दोबारा यहां सक्रिय न हो सकें।
इस दो दिवसीय अभियान की शुरुआत शनिवार को पटना तहसील के देवखोल जंगलों से हुई थी। संयुक्त टीम ने जब जंगल के भीतर प्रवेश किया, तो वहां का नजारा देख अधिकारी भी दंग रह गए। माफियाओं ने करीब 150 फीट लंबी और संकरी सुरंगें बना रखी थीं। टीम ने जान जोखिम में डालकर इन सुरंगों के भीतर प्रवेश किया और वहां से न केवल 6 टन से अधिक अवैध कोयला बरामद किया, बल्कि भारी मात्रा में खनन उपकरण भी जब्त किए। मौके से फावड़ा, गेती, विद्युत पंप, फुटबॉल पाइप और सैकड़ों मीटर बिजली के तार बरामद होना इस बात का प्रमाण है कि यहां संगठित तरीके से अवैध खनन को अंजाम दिया जा रहा था।
रविवार की कार्रवाई में समन्वय और शक्ति का अनूठा प्रदर्शन देखने को मिला। इस अभियान में केवल कोरिया जिला ही नहीं, बल्कि पड़ोसी जिलों—सूरजपुर, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) के खनिज अधिकारी भी शामिल रहे। इसके अलावा स्थानीय पुलिस, वन विभाग और राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने मिलकर पूरे क्षेत्र की घेराबंदी की। अधिकारियों का कहना है कि अंतर-जिला समन्वय से ही इस तरह के बड़े माफिया गिरोहों पर नकेल कसी जा सकती है।
प्रशासन ने अब भविष्य के लिए एक ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति तैयार की है। खनिज विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अब दक्षिण पूर्व कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) और वन विभाग के साथ मिलकर एक संयुक्त निगरानी तंत्र विकसित किया जाएगा। चूंकि अवैध खनन के अधिकांश स्थल वन भूमि या एसईसीएल के पट्टा क्षेत्रों के करीब हैं, इसलिए ड्रोन और पेट्रोलिंग टीम के जरिए इन क्षेत्रों की 24 घंटे निगरानी की जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि कोयला चोरी के इन सुरक्षित गलियारों को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए।
प्रशासन की इस आक्रामक कार्रवाई से अवैध कोयला कारोबार में लिप्त लोगों में दहशत का माहौल है। कलेक्टर और पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यह महज एक सांकेतिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि आने वाले दिनों में इसे और भी तेज किया जाएगा। चिन्हित स्थानों को ब्लास्टिंग से सील करने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि दोबारा इन क्षेत्रों में खनन के प्रयास किए गए, तो संबंधित लोगों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय प्रशासन अब इस बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन की सुरक्षा के लिए पूरी तरह कटिबद्ध नजर आ रहा है।
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