Korba Scandal
Korba Scandal: छत्तीसगढ़ के औद्योगिक शहर कोरबा से एक शर्मनाक मामला सामने आया है, जहां सरकारी सिस्टम के रक्षक ही भक्षक बनते नजर आ रहे हैं। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी थर्मल पावर स्टेशन (DSPM) के उच्च पदस्थ अधिकारी सरकारी मर्यादाओं को ताक पर रखकर सरकारी विश्राम गृह (रेस्टहाउस) को मयखाने में तब्दील कर चुके थे। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है, जिसके बाद शासन-प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
यह पूरा मामला सीएसईबी (CSEB) पुलिस चौकी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सरकारी रेस्टहाउस का है। जानकारी के मुताबिक, डीएसपीएम प्लांट के चीफ केमिस्ट गोवर्धन सिदार अपने चार अन्य साथी अधिकारियों के साथ रेस्टहाउस के वीआईपी (VIP) कमरे में जाम छलका रहे थे। जब कमरे का दरवाजा खुला, तो वहां का नजारा देखकर हर कोई दंग रह गया। कमरे के भीतर बीयर और महंगी शराब की बोतलें बिखरी हुई थीं और चारों तरफ सिगरेट का धुआं फैला हुआ था। सरकारी संपत्ति का इस तरह का दुरुपयोग अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इस मामले का खुलासा बेहद नाटकीय अंदाज में हुआ। शनिवार को छत्तीसगढ़ के पूर्व नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक कोरबा के दौरे पर थे। उनसे शिष्टाचार भेंट करने के लिए प्रदेश के उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, महापौर संजू देवी राजपूत और जिला भाजपा अध्यक्ष गोपाल मोदी इसी रेस्टहाउस में पहुंचे थे। इसी दौरान वहां मौजूद स्थानीय कार्यकर्ताओं को भनक लगी कि पास के ही वीआईपी कमरे में कुछ अधिकारी सरकारी पद की गरिमा भूलकर शराब पार्टी कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं ने तत्काल इसकी सूचना उद्योग मंत्री को दी।
सूचना मिलते ही उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने मामले की गंभीरता को समझा और मौके पर ही कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने बिना देर किए बिजली कंपनी (CSEB) के प्रबंध निदेशक (MD) एस.के. कटियार को फोन लगाया और पूरी स्थिति से अवगत कराया। मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी संस्थानों में इस तरह की अनुशासनहीनता और अनैतिक कार्य कतई बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उन्होंने कंपनी के एमडी को दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल और कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
घटना के बाद जब रेस्टहाउस के अन्य हिस्सों की जांच की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, न केवल कमरे में शराब पी जा रही थी, बल्कि रेस्टहाउस के किचन में रखे फ्रीजर से भी भारी मात्रा में शराब और बीयर की बोतलें बरामद की गईं। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकारी संसाधनों का उपयोग निजी ऐयाशी के लिए किया जा रहा था। स्थानीय लोगों का तो यहां तक कहना है कि इस रेस्टहाउस में ऐसी अवैध गतिविधियां लंबे समय से जारी थीं, लेकिन रसूखदार अधिकारियों के डर से कोई मुंह नहीं खोलता था।
मामले के तूल पकड़ने के बाद बिजली कंपनी के एमडी एस.के. कटियार ने जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने मीडिया को बताया कि चीफ केमिस्ट गोवर्धन सिदार और उनके साथ मौजूद अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। एमडी ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में कोई अन्य सरकारी कर्मचारी ऐसी हिमाकत न कर सके। फिलहाल, इस घटना ने जिले के प्रशासनिक और औद्योगिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
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