Nitish Cabinet Expansion
Nitish Cabinet Expansion: बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के मंत्रिपरिषद का विस्तार अगले महीने (दिसंबर) में होने की प्रबल संभावना है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जनता दल-यूनाइटेड (जेडीयू) अपने कोटे के छह खाली मंत्री पदों को भरने की तैयारी में जुटा है। इस विस्तार में जेडीयू कुशवाहा समुदाय और अति पिछड़े वर्ग के नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह देकर सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश करेगी। यह विस्तार न सिर्फ जेडीयू की संगठनात्मक मजबूती को दर्शाएगा, बल्कि सरकार में समावेशी प्रतिनिधित्व को भी बढ़ावा देगा। बिहार में मुख्यमंत्री को मिलाकर मंत्रियों की अधिकतम संख्या 36 हो सकती है। वर्तमान में, नीतीश मंत्रिपरिषद में कुल 9 पद रिक्त हैं, जिनमें जेडीयू के हिस्से के 6 पद और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के हिस्से के 3 पद खाली हैं।
एनडीए गठबंधन में मंत्री पद के बंटवारे का एक निर्धारित फार्मूला है। इस फार्मूले के तहत, सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बीजेपी के हिस्से में 17 मंत्री पद हैं, जबकि जेडीयू को मुख्यमंत्री समेत 15 मंत्री पद आवंटित हैं। इसके अलावा, लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) को 2 मंत्री पद, और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) तथा राष्ट्रीय लोक पार्टी (आरएलपी) को एक-एक मंत्री पद दिए गए हैं। इस मौजूदा गणित के हिसाब से, मंत्रिपरिषद में बीजेपी के 3 पद और जेडीयू के 6 पद खाली हैं, जिन्हें आगामी विस्तार में भरा जा सकता है। जेडीयू के लिए यह विस्तार एक अवसर है कि वह नए चेहरों को मौका दे और अपनी पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखे।
मंत्रिपरिषद के विस्तार के बाद, नए मंत्रियों को समायोजित करने के लिए वर्तमान में अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे मंत्रियों के विभागों में बदलाव होने की संभावना है। अभी जेडीयू कोटे के मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के पास 5 विभाग, विजय चौधरी के पास 4 विभाग, और श्रवण कुमार व सुनील कुमार के पास 2-2 विभाग हैं। इसी तरह, बीजेपी कोटे के मंत्री विजय सिंह, मंगल पांडेय, नितिन नवीन और अरुण शंकर प्रसाद के पास भी 2-2 विभाग हैं। नए मंत्रियों के आगमन के बाद, इन अनुभवी मंत्रियों के पास मौजूद कुछ अतिरिक्त विभाग उन्हें सौंपे जा सकते हैं। इस कदम से न केवल मंत्रियों के कार्यभार को हल्का किया जा सकेगा, बल्कि प्रशासनिक दक्षता में भी सुधार आने की उम्मीद है। जेडीयू नए चेहरों को मौका देने की रणनीति पर काम कर रही है, ताकि पार्टी में ऊर्जा का संचार हो सके।
मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी थी कि जेडीयू दूसरे दलों के विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है और उन्हें मंत्रिपरिषद में जगह मिल सकती है। हालांकि, जेडीयू के शीर्ष सूत्रों ने इस तरह की खबरों का दृढ़ता से खंडन किया है। जेडीयू सूत्रों के अनुसार, फिलहाल किसी भी अन्य दल के विधायक को तोड़ने या शामिल करने की कोई आवश्यकता नहीं है। वर्तमान राजनीतिक और संख्या बल की स्थिति को देखते हुए, पार्टी का मानना है कि उन्हें बाहरी समर्थन की आवश्यकता नहीं है। विशेष रूप से, राज्यसभा के चुनाव में अभी छह महीने का समय बाकी है, और मौजूदा संख्या बल के आधार पर एनडीए गठबंधन सभी पाँच सीटें जीतने की मजबूत स्थिति में है। इसलिए, जेडीयू का पूरा ध्यान आंतरिक संगठन और पार्टी के प्रति निष्ठा रखने वाले नेताओं को मंत्रिपरिषद में शामिल करने पर केंद्रित है।
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