Asia Cup 2025 में जहां एक ओर क्रिकेट फैंस की नजरें मैदान पर टिकीं हैं, वहीं दूसरी ओर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के दरवाजे पर एक बड़ा विवाद दस्तक दे चुका है। टूर्नामेंट के बीच उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन (CAU) पर 12 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप सामने आया है। यह मामला अब नैनीताल हाई कोर्ट तक पहुंच गया है और कोर्ट ने इस पर BCCI को नोटिस भी जारी कर दिया है।
इस कथित घोटाले में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना है खिलाड़ियों को दिए गए 35 लाख रुपये के केले। याचिकाकर्ता संजय रावत ने कोर्ट को बताया कि CAU की ऑडिट रिपोर्ट में दिखाया गया है कि खिलाड़ियों को इतने कीले खिलाए गए, जो वास्तविकता से बिल्कुल परे है। याचिका में यह भी आरोप है कि खाने-पीने और ट्रेनिंग कैंप के नाम पर फर्जी खर्च दिखाए गए हैं।
जस्टिस मनोज कुमार तिवारी की एकल पीठ ने इस मामले में BCCI को नोटिस भेजा है और इस घोटाले को लेकर जवाब मांगा है। कोर्ट ने अगली सुनवाई अगले शुक्रवार को निर्धारित की है।
याचिकाकर्ता संजय रावत ने आरोप लगाया कि CAU ने खिलाड़ियों के विकास और क्रिकेट गतिविधियों के लिए दिए गए सरकारी फंड का दुरुपयोग किया। याचिका में कहा गया है कि ऑडिट भी जानबूझकर बाहर के सीए से कराया गया, ताकि घोटाले पर पर्दा डाला जा सके। रावत ने कोर्ट से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
याचिकाकर्ता का दावा है कि ग्राउंड लेवल पर ना तो खिलाड़ियों को सुविधाएं मिल रही हैं, और ना ही आयोजन में पारदर्शिता बरती जा रही है। फंड का बड़ा हिस्सा निजी खर्चों और फर्जी बिलों में दिखाया गया है।
हालांकि यह मामला सीधे उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़ा है, लेकिन चूंकि ये एसोसिएशन BCCI के अधीन काम करता है, इसलिए हाई कोर्ट ने BCCI से इस मामले में जवाब मांगा है। यदि आरोप साबित होते हैं, तो BCCI की जवाबदेही और गवर्नेंस सिस्टम पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
अगली सुनवाई अगले शुक्रवार को होगी। कोर्ट द्वारा BCCI का जवाब आने के बाद मामले की जांच की दिशा तय की जाएगी। यदि घोटाले के आरोप सही साबित होते हैं, तो उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन पर वित्तीय कार्रवाई और प्रशासकीय बदलाव भी संभव हैं।
जब पूरा देश Asia Cup 2025 की धूम में डूबा है, ऐसे में उत्तराखंड क्रिकेट में हुआ यह कथित घोटाला भारतीय क्रिकेट के लिए एक बड़ा कलंक साबित हो सकता है। 35 लाख रुपये के केले और करोड़ों की अन्य गड़बड़ियों ने क्रिकेट प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि हाई कोर्ट और BCCI इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
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