Operation Sindoor debate : मानसून सत्र के पहले ही दिन संसद का माहौल गरमा गया। विपक्ष ने सरकार पर ‘संसद में आवाज दबाने’ का आरोप लगाया। विपक्ष की ओर से पहलगांव आतंकी हमले, ऑपरेशन सिंदूर और बिहार मतदाता सूची विवाद जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग की गई, जिसे लेकर संसद के दोनों सदनों में तीखा हंगामा हुआ। नतीजतन, लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित होती रही।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सत्र के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा,“मैं विपक्ष का नेता हूं, मुझे बोलने का अधिकार है। लेकिन मुझे नहीं बोलने दिया गया। जब हमने ऑपरेशन सिंदूर और पहलगांव हमले पर जवाब मांगा तो प्रधानमंत्री एक सेकंड में लोकसभा से भाग गए।”राहुल ने आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ अपने पक्ष के लोगों को बोलने देती है और विपक्ष को दबाने का प्रयास कर रही है।
संसद की शुरुआत पहलगांव हमले और एयर इंडिया विमान दुर्घटना के पीड़ितों के लिए एक मिनट का मौन रखकर हुई। लेकिन उसके बाद जैसे ही विपक्ष ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगना शुरू किया, सदन में हंगामा शुरू हो गया। इसी बीच लोकसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे और फिर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई।
राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार से ऑपरेशन सिंदूर, डोनाल्ड ट्रम्प के कश्मीर पर मध्यस्थता वाले पुराने बयान, और भारत-पाक संबंधों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि संसद को इन मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए क्योंकि देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
लेकिन सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने जवाब देते हुए कहा,“सरकार हर सवाल का जवाब देने को तैयार है। लेकिन विपक्ष को पहले सदन की गरिमा बनाए रखनी होगी।” इसके बावजूद विपक्षी सांसदों ने बहिर्गमन कर सदन से बाहर निकलने का फैसला लिया।
राज्यसभा से वॉकआउट करने के बाद विपक्षी सांसदों ने मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि संसद में उनके सवालों को जानबूझकर दबाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को लोकतंत्र में विश्वास है तो उसे सवालों का उत्तर देना चाहिए, चर्चा से भागना नहीं चाहिए।
जब विपक्षी सांसदों ने दोपहर 2 बजे लोकसभा में बोलने का प्रयास किया, तो उन्हें फिर रोका गया। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही को शाम 4 बजे तक स्थगित कर दिया गया। इससे विपक्ष का आक्रोश और बढ़ गया।
विपक्ष की मांग ऑपरेशन सिंदूर को लेकर चर्चा की थी, जिसमें भारतीय सुरक्षा बलों की कार्रवाई और पाकिस्तानी सीमा पर सैन्य गतिशीलता शामिल है। इस ऑपरेशन की आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे विपक्ष सरकार पर ‘जानकारी छुपाने’ का आरोप लगा रहा है।
राज्यसभा में खड़गे ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उन्हें कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता का प्रस्ताव भारत सरकार की ओर से मिला था। खड़गे ने कहा कि यह गंभीर मामला है और प्रधानमंत्री को खुद संसद में आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
सरकार की ओर से JP नड्डा और अन्य मंत्रियों ने कहा कि विपक्ष को सदन में शांति बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर विपक्ष नियमों के तहत मुद्दे उठाएगा तो सरकार सभी सवालों का जवाब देने को तैयार है।
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत टकराव, आरोप-प्रत्यारोप और स्थगनों से हुई है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे वरिष्ठ विपक्षी नेताओं की सीधी नाराजगी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का संकेत है। आने वाले दिनों में अगर सरकार विपक्ष की बात सुनने को तैयार नहीं होती, तो संसद का सत्र पूरी तरह हंगामे की भेंट चढ़ सकता है।
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