Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर के बीच जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ‘ग्रे जोन वॉरफेयर’ की रणनीति का किया खुलासा

Operation Sindoor : सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने आने वाले समय में एक खतरनाक और जटिल युद्ध की आशंका जताई है। उन्होंने आगाह किया कि भारत का अगला युद्ध पारंपरिक नहीं होगा, बल्कि यह ग्रे जोन वॉरफेयर का रूप ले सकता है, जिसमें दुश्मन को किसी अन्य देश का समर्थन भी मिल सकता है।

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यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर अमेरिका के दौरे पर हैं, और भारत के रणनीतिक हलकों में इस दौरे को लेकर पहले से ही सतर्कता बनी हुई है। हालाँकि, सेना प्रमुख ने किसी देश का सीधा नाम नहीं लिया।

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“अगली बार दुश्मन अकेला नहीं होगा…”

4 अगस्त को दिए गए इस बयान का वीडियो 10 अगस्त (रविवार) को सार्वजनिक किया गया। जनरल द्विवेदी ने कहा,“अगली बार का खतरा कहीं ज़्यादा गंभीर होगा। दुश्मन अकेले नहीं आएगा, वह किसी और देश के साथ मिलकर भी आ सकता है। हमें नहीं पता कि कौन उसके साथ होगा, लेकिन यह तय है कि वह अकेला नहीं होगा। इसलिए हमें पूरी तरह तैयार रहना होगा।”

ऑपरेशन सिंदूर: युद्ध की नई परिभाषा

सेना प्रमुख ने हाल में हुए ऑपरेशन सिंदूर का ज़िक्र करते हुए इसे एक “शतरंज की बाज़ी” करार दिया। उन्होंने बताया कि यह लड़ाई पारंपरिक युद्ध जैसी नहीं थी, बल्कि इसमें कई छिपी रणनीतियाँ और अनदेखे खतरे शामिल थे। उन्होंने कहा,“ग्रे जोन का अर्थ है कि आप पारंपरिक युद्ध नहीं लड़ रहे, लेकिन कुछ ऐसा कर रहे हैं जो उतना ही घातक है। ऑपरेशन सिंदूर ने हमें यही सिखाया कि युद्ध अब सिर्फ बम और बंदूकों से नहीं लड़े जाते, बल्कि रणनीतिक चालों से भी लड़े जाते हैं।” उन्होंने क्रिकेट की तुलना करते हुए कहा, “यह टेस्ट मैच चौथे दिन रुक गया, लेकिन यह 14 दिन, 140 दिन या 1400 दिन भी चल सकता था। हमें हर परिदृश्य के लिए तैयार रहना होगा।”

“ढाई मोर्चों से जूझ रहा है भारत”

जनरल द्विवेदी ने यह भी कहा कि भारत “ढाई मोर्चों” पर युद्ध जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। इसका सीधा संकेत चीन, पाकिस्तान और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों की ओर था। उन्होंने कहा कि इस लड़ाई को सिर्फ सेना नहीं लड़ेगी, बल्कि यह “पूरे देश की सामूहिक जिम्मेदारी” होगी। उन्होंने स्पष्ट किया, “लोगों की मानसिकता आज ये बन गई है कि हर संघर्ष में जमीन जीतनी है, विजय भी जमीन के रूप में देखी जाती है। हमें इस मानसिकता को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारियां करनी होंगी।”

रणनीति का नया युग

जनरल द्विवेदी ने यह संकेत दिया कि आने वाला युद्ध लंबी अवधि का और बहुआयामी हो सकता है, जिसमें लड़ाई सिर्फ सीमाओं पर नहीं, बल्कि साइबर, कूटनीति और सूचना के मोर्चों पर भी होगी। उन्होंने कहा, “कुछ दिखाई देता है, कुछ नहीं दिखता – यही ग्रे जोन है। ऐसे में हो सकता है कि दूसरे देश भी हमारे दुश्मनों की मदद कर रहे हों।”

सेना प्रमुख का यह बयान देश के रणनीतिक हलकों के लिए एक जोरदार चेतावनी है। यह न सिर्फ सीमा पर सतर्कता का आह्वान है, बल्कि देश की आंतरिक एकता और सामूहिक तैयारी की भी मांग करता है। जहां एक ओर वैश्विक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, वहीं भारत को अब पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर ग्रे जोन संघर्षों के लिए खुद को तैयार करना होगा।

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