CEC Gyanesh Kumar
CEC Gyanesh Kumar : नई दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को राज्यसभा के करीब 73 सांसदों ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को एक नया औपचारिक नोटिस सौंपा है। यह कदम तमिलनाडु विधानसभा चुनाव और पश्चिम बंगाल के प्रथम चरण के मतदान के तुरंत बाद उठाया गया है। विपक्षी सांसदों का तर्क है कि यह नया नोटिस हाल ही में सामने आए विशिष्ट आधारों और साक्ष्यों पर आधारित है, जो चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
सभापति को भेजे गए पत्र में सांसदों ने स्पष्ट किया है कि यह शिकायत 15 मार्च 2026 के बाद ज्ञानेश कुमार द्वारा किए गए कार्यों और निर्णयों तक सीमित है। विपक्ष का आरोप है कि इस अवधि के दौरान उनके द्वारा की गई चूक और लिए गए फैसले ‘गंभीर स्तर के सिद्ध दुराचार’ की श्रेणी में आते हैं। सांसदों ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया जाए। इस प्रस्तावित कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के एक मौजूदा न्यायाधीश, किसी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक अन्य न्यायिक विशेषज्ञ को शामिल करने की बात कही गई है। विपक्ष चाहता है कि जब तक जांच लंबित रहे, तब तक ज्ञानेश कुमार चुनावी जिम्मेदारियों से दूर रहें।
यह पहली बार नहीं है जब ज्ञानेश कुमार विपक्ष के निशाने पर आए हैं। इससे पहले 12 मार्च को भी 63 राज्यसभा और 130 लोकसभा सांसदों ने उन्हें हटाने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, 6 अप्रैल को राज्यसभा सभापति और लोकसभा अध्यक्ष ने प्रारंभिक सबूतों की कमी का हवाला देते हुए इन प्रस्तावों को खारिज कर दिया था। लेकिन इस बार विपक्ष का दावा है कि उनके पास हालिया चुनाव प्रचार के दौरान हुए पक्षपात के पुख्ता प्रमाण हैं, जो पिछले खारिज किए गए नोटिसों से बिल्कुल अलग और अधिक प्रभावी हैं।
नए प्रस्ताव में सबसे बड़ा आरोप आचार संहिता (MCC) के कार्यान्वयन में ‘दोहरे मानदंड’ अपनाने का है। सांसदों ने 18 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए 29 मिनट के भाषण का विशेष उल्लेख किया है। आरोप है कि सरकारी चैनलों (दूरदर्शन, संसद टीवी और आकाशवाणी) पर लाइव प्रसारित यह भाषण कोयंबटूर की चुनावी रैली के समान था। पत्र के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कांग्रेस, डीमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी का नाम लेकर तीखी आलोचना की और उन पर संवैधानिक संशोधन विधेयक के मामले में ‘भ्रूण हत्या’ जैसा अपराध करने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयुक्त ने इस तरह के भाषणों पर मौन रहकर अपनी तटस्थता खो दी है।
विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया है कि जब राज्यसभा सांसद मनोज झा और अन्य नेताओं ने 19 अप्रैल को मुख्य चुनाव आयुक्त से लिखित शिकायत की, तो उस पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया। वहीं, 20 अप्रैल को 700 नागरिकों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन पर भी आयोग ने कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया। इसके विपरीत, पत्र में यह आरोप लगाया गया है कि भाजपा द्वारा विपक्षी नेताओं, विशेषकर कांग्रेस के खिलाफ की गई शिकायतों पर ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाले आयोग ने बिजली की गति से कार्रवाई की। विपक्ष का मानना है कि यह व्यवहार लोकतंत्र के लिए घातक है और चुनाव आयोग की गरिमा को ठेस पहुँचाता है। अब सबकी निगाहें सभापति के अगले कदम पर टिकी हैं।
Read More : CG Anganwadi Update: छत्तीसगढ़ में गर्मी का तांडव, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बदला आंगनबाड़ी केंद्रों का समय
Turkish Leader : भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के तमाम देशों में मूंछों को पुरुषत्व,…
Terrace Garden : आज के दौर में शुद्ध और केमिकल मुक्त सब्जियां प्राप्त करना एक…
Punjab Politics : आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी…
Benjamin Netanyahu Cancer : इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक चौंकाने वाले खुलासे में…
West Bengal Election : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान ने…
AAP Political Crisis : भारतीय राजनीति के गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब…
This website uses cookies.