AAP Political Crisis
AAP Political Crisis : भारतीय राजनीति के गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब आम आदमी पार्टी (AAP) के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अपने पद और पार्टी से इस्तीफा दे दिया। यह केवल एक व्यक्तिगत इस्तीफा नहीं था, बल्कि पार्टी के भीतर एक बड़ी बगावत का संकेत था। राघव चड्ढा के साथ संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भी भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इन नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाई। गौरतलब है कि अशोक मित्तल के ठिकानों पर हाल ही में छापेमारी हुई थी, जिसके बाद उनके इस कदम को राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर ‘आप’ के मार्गदर्शक रहे समाजसेवी अन्ना हजारे ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। अन्ना ने बेहद सख्त लहजे में पार्टी नेतृत्व को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति अपनी राय रखने और कहीं भी जाने के लिए स्वतंत्र है। अन्ना ने सीधे तौर पर पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा, “अगर कोई पार्टी से अलग हो रहा है, तो दोष पार्टी का ही है। अगर पार्टी सही तरीके से चल रही होती, तो ये लोग छोड़कर नहीं जाते।” अन्ना का यह बयान अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व के लिए एक बड़ा नैतिक झटका माना जा रहा है।
अन्ना हजारे यहीं नहीं रुके, उन्होंने आंदोलन से निकली इस पार्टी के भटकाव पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब किसी संगठन में स्वार्थ हावी हो जाता है, तो लोग देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भूल जाते हैं। अन्ना के अनुसार, “ये लोग अब सत्ता और पैसे के पीछे भाग रहे हैं, जिसके कारण पूरी व्यवस्था में गड़बड़ी पैदा हो गई है।” उन्होंने सांसदों के जाने को उनकी दिक्कतों और नाराजगी का परिणाम बताया और कहा कि किसी को जबरन रोककर रखना लोकतंत्र के खिलाफ है।
राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ते ही एक बड़ा दावा किया है कि राज्यसभा के कुल 10 सांसदों में से 7 सांसद उनके साथ हैं। इनमें हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रमजीत सिंह साहनी और राजेंद्र गुप्ता जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। वर्तमान में चड्ढा, पाठक और मित्तल बीजेपी में शामिल हो चुके हैं, जबकि अन्य सांसद भी कतार में बताए जा रहे हैं। स्वाति मालीवाल ने भी ईटानगर से संदेश भेजकर पार्टी छोड़ने की पुष्टि कर दी है। यदि राघव चड्ढा का दो-तिहाई बहुमत वाला दावा सही साबित होता है, तो राज्यसभा में आम आदमी पार्टी का संख्या बल नगण्य रह जाएगा।
राघव चड्ढा ने अपने इस्तीफे के दौरान भावुक होते हुए कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने 15 साल दिए, वह आज अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अब भ्रष्ट लोगों के हाथों में है और आम जनता की उम्मीदें टूट चुकी हैं। दूसरी तरफ, बीजेपी ने इन नेताओं का स्वागत करते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की जीत बताया है। अब देखना यह होगा कि इस बड़ी टूट के बाद अरविंद केजरीवाल दिल्ली और पंजाब में अपनी पकड़ को कैसे बरकरार रखते हैं, क्योंकि उनके सबसे भरोसेमंद सिपाही अब उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी के साथ खड़े हैं।
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