राजनीति

West Bengal Election : बंगाल में 92% वोटिंग का गणित, क्या SIR ने बदल दिया पूरा चुनावी समीकरण?

West Bengal Election :  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान ने एक नया इतिहास रच दिया है। 23 अप्रैल को संपन्न हुए इस चरण में कुल 93 फीसद मतदान दर्ज किया गया है, जो साल 2021 के विधानसभा चुनाव के 83.33 फीसद की तुलना में काफी अधिक है। दिलचस्प बात यह है कि इस बार कुल मतदाताओं की संख्या पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 18 लाख कम थी, लेकिन वोट डालने वालों का जज्बा कहीं ज्यादा दिखा। आंकड़ों के अनुसार, इस चरण में कुल 3.35 करोड़ लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जबकि 2021 में यह संख्या 3.15 करोड़ थी। चुनाव आयोग फिलहाल विधानसभावार सटीक आंकड़ों की गहन समीक्षा कर रहा है।

मतदाता सूची का विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR): क्यों कम हुए 18 लाख नाम?

मतदाता सूची में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे मुख्य कारण ‘विशेष सघन पुनरीक्षण’ (SIR) को माना जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत करीब 27 लाख नाम सूची से हटाए गए थे। हालांकि, सात लाख नए युवा मतदाता सूची में जुड़े भी, लेकिन कुल जोड़-घटाव के बाद 2021 की तुलना में मतदाताओं का आंकड़ा 18 लाख कम रह गया। हटाए गए नामों को लेकर लाखों अपीलें ट्रिब्यूनल के पास लंबित थीं, जिनमें से पहले चरण तक केवल कुछ सौ अपीलों को ही हरी झंडी मिल सकी। यही कारण है कि कुल मतदाता 3.78 करोड़ से घटकर 3.60 करोड़ रह गए, जिससे मतदान प्रतिशत में भारी उछाल दिखाई दे रहा है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने जताया आभार: तमिलनाडु और बंगाल ने रचा इतिहास

भारी मतदान प्रतिशत को देखते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पश्चिम बंगाल के मतदाताओं का विशेष आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में अब तक का यह सबसे अधिक मतदान प्रतिशत है। आयोग के अनुसार, पहले चरण का मतदान 44,376 बूथों पर संपन्न हुआ, जिसमें तीन हजार सहायक बूथ भी शामिल थे। चुनाव को समावेशी बनाने के लिए 5,444 बूथों का प्रबंधन पूरी तरह से महिला कर्मियों द्वारा किया गया और 207 मॉडल बूथों के जरिए मतदाताओं को विशेष सुविधाएं प्रदान की गईं।

दूसरे चरण की तैयारी: 29 अप्रैल को फिर होगा भाग्य का फैसला

पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र का अगला उत्सव अगले बुधवार, यानी 29 अप्रैल को दूसरे चरण के मतदान के साथ मनाया जाएगा। आयोग ने संकेत दिया है कि 27 अप्रैल तक उन मतदाताओं के नाम सूची में जोड़ दिए जाएंगे, जिनकी अपीलों को ट्रिब्यूनल से मंजूरी मिल जाएगी। जानकारों का कहना है कि न केवल बंगाल, बल्कि असम, केरल और पुडुचेरी जैसे राज्यों में भी SIR के बाद मतदान प्रतिशत में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है। यह रुझान दर्शाता है कि मतदाता अब अपने वोट के अधिकार के प्रति पहले से कहीं अधिक जागरूक और सक्रिय हो गए हैं।

विधानसभा वार विश्लेषण: मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों और पहाड़ों का रुझान

पहले चरण में मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों जैसे मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तरी दिनाजपुर और बीरभूम में भारी मतदान देखने को मिला है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि सिताकुची में सर्वाधिक 97.53% वोटिंग हुई, जबकि सिताई, हेमटाबाद और सुती जैसे 20 से अधिक क्षेत्रों में 94% से ज्यादा मतदान हुआ। इसके विपरीत, पहाड़ी क्षेत्रों में मतदान का प्रतिशत तुलनात्मक रूप से कम रहा; दार्जिलिंग में 82.16%, कुरसियोंग में 82.36% और कलीमपोंग में 83.07% वोट पड़े। हालांकि, पूरे चरण में किसी भी सीट पर मतदान 84% से कम (पहाड़ी क्षेत्रों को छोड़कर) नहीं रहा, जो अपने आप में एक मिसाल है।

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