Oral Cancer: हमारे मुंह के भीतर छोटे-मोटे छाले पड़ना एक बेहद ही आम और सामान्य प्रक्रिया है। कई बार कुछ ज्यादा गर्म खा लेने या असावधानी से जीभ कट जाने की वजह से मुंह के अंदर छाले निकल आते हैं। वास्तव में, हमारे मुंह के आंतरिक हिस्से की त्वचा बेहद संवेदनशील और नाजुक होती है, जिसके कारण वहां छालों का आना स्वाभाविक माना जाता है। आम तौर पर ये छाले कुछ ही दिनों में अपने आप ठीक भी हो जाते हैं।

ठीक इसी प्रकार, मौसम बदलने या सर्दी-जुकाम होने की वजह से हमारी आवाज का बैठ जाना या भारी हो जाना भी एक आम समस्या है। लेकिन, यदि आपके मुंह के छाले लगातार बने हुए हैं और आवाज में आया बदलाव भी हफ्तों तक ठीक नहीं हो रहा है, तो आपको तुरंत सावधान हो जाने की जरूरत है। यह स्थिति सामान्य न होकर खतरनाक ओरल कैंसर (मुंह के कैंसर) का शुरुआती संकेत हो सकती है। दिल्ली के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के ईएनटी, हेड एंड नेक सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. नईम अहमद सिद्दीकी का कहना है कि इस गंभीर बीमारी के लक्षणों को विस्तार से समझना बेहद जरूरी है, ताकि समय रहते बचाव किया जा सके।

पहचानिए ओरल कैंसर के ये शुरुआती लक्षण
डॉक्टरों के अनुसार, ओरल कैंसर की शुरुआत बहुत ही धीमे और सामान्य लक्षणों के साथ होती है, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। मुंह के अंदर लगातार छालों का होना और दवाओं के बाद भी उनका जल्दी ठीक न होना इसका पहला प्रमुख लक्षण है। इसके अलावा, बिना किसी सर्दी-खांसी के आवाज का अचानक बदल जाना, मुंह के भीतर मखमली सफेद या गहरे लाल रंग के धब्बे (पैच) दिखाई देना, मसूड़ों में अचानक दर्द रहित सूजन आ जाना या गालों के अंदरूनी हिस्से में गांठ महसूस होना इसके शुरुआती संकेत हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर बिना समय गंवाए विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
तंबाकू, धूम्रपान और खराब ओरल हाइजीन हैं मुख्य कारण
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, ओरल कैंसर होने के पीछे कुछ बेहद खराब आदतें और लापरवाही मुख्य रूप से जिम्मेदार होती हैं। भारत में इस कैंसर का सबसे बड़ा कारण तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट, गुटखा और पान मसाले का अत्यधिक सेवन है। इसके साथ ही शराब (अल्कोहल) का लगातार सेवन भी मुंह के कैंसर के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है। इन आदतों के अलावा, ओरल हाइजीन (मुंह की साफ-सफाई) का ध्यान न रखना, नियमित रूप से ब्रश न करना, और लंबे समय तक दांतों या मसूड़ों के संक्रमण का इलाज न कराना भी मुंह के भीतर कैंसर कोशिकाओं को पनपने में मदद करता है।
जानिए किस स्थिति में तुरंत डॉक्टर के पास जाना है अनिवार्य
यदि आपके मुंह का कोई छाला या घाव लगातार 2 से 3 सप्ताह से ज्यादा समय तक बना रहे और उसमें धीरे-धीरे दर्द बढ़ने लगे, तो यह खतरे की घंटी है। इसके अलावा, यदि घाव का आकार लगातार बढ़ रहा हो, भोजन को चबाने या निगलने में तकलीफ हो रही हो, बिना किसी वजह के दांत ढीले होकर टूटने लगें, अचानक तेजी से वजन घटने लगे और शरीर में हर वक्त अत्यधिक कमजोरी या थकान महसूस हो, तो व्यक्ति को तुरंत कैंसर विशेषज्ञ या ईएनटी डॉक्टर से संपर्क कर बायोप्सी और अन्य जरूरी टेस्ट कराने चाहिए।
बिना सर्दी-जुकाम के आवाज का बैठना हो सकता है जानलेवा
अक्सर लोग सोचते हैं कि आवाज का भारी होना सिर्फ गले की खराश है। लेकिन, बिना किसी सर्दी या फ्लू के भी यदि आपकी आवाज लंबे समय तक बैठी हुई है या उसमें भारीपन बना हुआ है, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में न लें। यह गले, वोकल कॉर्ड या मुंह के पिछले हिस्से में पनप रहे किसी गंभीर ट्यूमर का साफ संकेत हो सकता है, जिसमें ओरल कैंसर होने की पूरी संभावना शामिल होती है।
समय पर सटीक जांच और इलाज से बच सकती है मरीज की जान
ओरल कैंसर के संदर्भ में सबसे राहत की बात यह है कि यदि इसके शुरुआती चरण (फर्स्ट स्टेज) में ही बीमारी की पहचान कर ली जाए, तो आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के जरिए इसका पूर्ण इलाज पूरी तरह संभव है। शुरुआती दौर में बीमारी पकड़ में आने से मरीज के पूरी तरह ठीक होने की संभावना बहुत अधिक रहती है। डॉक्टर आमतौर पर मुंह की गहन शारीरिक जांच, प्रभावित हिस्से की बायोप्सी, सीटी स्कैन या एमआरआई के जरिए कैंसर की पुष्टि करते हैं। बीमारी का पता जितनी जल्दी चलता है, इलाज की प्रक्रिया उतनी ही सरल, कम खर्चीली और सफल साबित होती है।
Read More : Bihar Teacher Transfer : ट्रांसफर और पोस्टिंग के बीच मुख्यमंत्री का बड़ा फरमान, शिक्षकों में मचा भारी हड़कंप











