OTT ban India : भारत सरकार ने डिजिटल माध्यमों पर बढ़ती अश्लील सामग्री पर रोक लगाने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ‘उल्लू’, ‘ALTT’, ‘बिग शॉट्स ऐप’ सहित 25 मोबाइल ऐप्स और वेबसाइटों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। इन प्लेटफॉर्म्स पर वर्षों से आपत्तिजनक विज्ञापन और सामग्री प्रसारित की जा रही थी, जो सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही थी।
भारतीय इंटरनेट सेवा प्रदाता संघ (ISPAI) ने इस प्रतिबंध के संबंध में पहले ही अधिसूचना जारी कर दी थी। अधिसूचना में यह साफ किया गया कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह इन ऐप्स का वर्तमान उपयोगकर्ता हो या नहीं, अब इन सेवाओं तक पहुँच नहीं बना सकेगा। सरकार ने सभी इंटरनेट कंपनियों और मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटरों को इन वेबसाइटों और ऐप्स की डिजिटल पहुँच तत्काल बंद करने के निर्देश दिए हैं।
प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म्स की सूची में ‘उल्लू’, ‘ALTT’, ‘बिग शॉट्स ऐप’, ‘डेसिफ्लिक्स’, ‘ब्यूमेक्स’, ‘नवरसा लाइट’, ‘गुलाब ऐप’, ‘कंगन ऐप’, ‘बुल ऐप’, ‘जलवा ऐप’, ‘वाउ एंटरटेनमेंट’, ‘लुक एंटरटेनमेंट’, ‘हिटप्राइम’, ‘फेनियो’, ‘शो-एक्स’, ‘सोल टॉकीज़’, ‘अड्डा टीवी’, ‘हॉटएक्स वीआईपी’, ‘होलचल ऐप’, ‘म्यूडेक्स’, ‘नियोनेक्स वीआईपी’, ‘फ़ूजी’, ‘मोजीफ्लिक्स’ और ‘ट्रिफ्लिक्स’ जैसे नाम शामिल हैं। ये सभी प्लेटफॉर्म्स ऑनलाइन स्ट्रीमिंग के ज़रिए व्यापक स्तर पर वयस्क सामग्री दिखाते थे और युवाओं में तेजी से लोकप्रिय हो रहे थे।
सरकार ने इन ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने के पीछे कानूनी आधार भी स्पष्ट किया है। इन सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 67 और 67ए, भारतीय दंड संहिता 2023 की धारा 294, और 1986 के अश्लील नियंत्रण अधिनियम की धारा 4 के उल्लंघन का आरोप है। इन धाराओं के अंतर्गत किसी भी सार्वजनिक माध्यम पर अश्लील या आपत्तिजनक सामग्री का प्रसार दंडनीय अपराध है।
इस कदम को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर नैतिकता बनाए रखने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह भारत को एक स्वच्छ और सुरक्षित डिजिटल वातावरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में जो भी ऐप्स या वेबसाइटें अश्लीलता या अनैतिक कंटेंट के जरिए समाज में नकारात्मकता फैलाएंगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैल रही अश्लील सामग्री को देखते हुए सरकार ने निर्णायक कार्रवाई करते हुए 25 प्रमुख ऐप्स और वेबसाइटों को प्रतिबंधित कर दिया है। यह कदम न केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी था, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए भी एक अहम संकेत माना जा रहा है।
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