Odisha women crime 2025: ओडिशा में बीजेपी शासन के पिछले 14 महीनों के दौरान महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में भारी वृद्धि देखी गई है। राज्य के मुख्यमंत्री मोहान माझी ने हाल ही में विधानसभा में इस बारे में आंकड़े पेश किए, जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि 1 जून 2024 से 31 जुलाई 2025 तक महिलाओं के खिलाफ कुल 37,611 मामले दर्ज किए गए हैं। इन अपराधों में बलात्कार, बलात्कार के प्रयास, यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ और सार्वजनिक निर्वस्त्रता जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। आंकड़े बोल रहे हैं – महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े बीजद के नेतृत्व में ओडिशा ने पहले सुरक्षा के क्षेत्र में प्रगति की थी, लेकिन बीजेपी के सत्ता में आने के बाद हालात बदतर होते दिख रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामले दोगुने हो गए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, सबसे अधिक मामले छेड़छाड़ के (9,181) हैं। इसके बाद महिलाओं के अपहरण के प्रयास के मामले 8,227 दर्ज हुए। दहेज से जुड़ी घटनाओं में भी वृद्धि हुई है, जिसमें बिना दहेज मांगे दुल्हन पर हमला करने के 6,134 मामले और दहेज की मांग से जुड़े 5,464 मामले शामिल हैं। बलात्कार के 2,933 मामले और यौन उत्पीड़न के 1,278 मामले भी दर्ज किए गए। इसके अलावा, महिलाओं को सार्वजनिक रूप से निर्वस्त्र करके प्रताड़ित करने के भी 2,161 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 799 आरोपितों को दोषी पाया गया। बलात्कार के मामलों में 426 आरोपी दोषी ठहराए गए। सरकार की प्रतिक्रिया और सुरक्षा उपाय महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 24 पॉक्सो अदालतें स्थापित की हैं, जो नाबालिगों पर होने वाले अत्याचार के मामलों की सुनवाई करती हैं। इसके साथ ही, राज्य के 29 जिलों में विशेष जांच दल बनाए गए हैं, जो महिलाओं के खिलाफ हिंसा की जांच में सक्रिय हैं। मुख्यमंत्री मोहन माझी ने कहा है कि महिलाओं के खिलाफ बड़े अपराधों की जांच में पुलिस अधीक्षक और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भी शामिल होंगे, ताकि जांच निष्पक्ष और प्रभावी हो। इसके अलावा, संकट में महिलाएं 112 हेल्पलाइन पर कॉल कर तत्काल मदद प्राप्त कर सकती हैं। स्थिति गंभीर, लेकिन सरकार भी गंभीर ओडिशा में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों की यह संख्या चिंताजनक है। भाजपा शासन के 14 महीनों में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामले दोगुने हो जाना एक गंभीर संकेत है, जो राज्य की कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा के लिए खतरे का संकेत देता है। मुख्यमंत्री की यह घोषणा और सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम सकारात्मक हैं, लेकिन प्रदेश की जनता को भी इस समस्या से निपटने के लिए सतर्क और जागरूक रहना होगा। महिलाओं की सुरक्षा के लिए समाज, प्रशासन और सरकार को मिलकर प्रयास करना होगा ताकि ओडिशा फिर से एक सुरक्षित और समृद्ध राज्य बन सके। Read More: CBSE Board Exam 2026: कक्षा 10वीं और 12वीं की अस्थाई डेटशीट जारी, यहां करें PDF डाउनलोड














