Asaduddin Owaisi : अंतरराष्ट्रीय पटल पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और उसके कारण पैदा हुए वित्तीय संकट को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बेहद तीखा और बड़ा बयान दिया है। हैदराबाद में मीडिया से बातचीत करते हुए ओवैसी ने दुनिया भर में मची मौजूदा आर्थिक उथल-पुथल और वित्तीय अस्थिरता के लिए सीधे तौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियों को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि इन दोनों कद्दावर नेताओं की आक्रामक और संकीर्ण सैन्य रणनीतियों के कारण ही आज विकासशील और विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाएं व आम जनता गहरे संकट का सामना कर रही हैं।

तेल-गैस संकट और वैश्विक वित्तीय असंतुलन पर गंभीर आरोप
ओवैसी ने खाड़ी देशों में जारी संघर्ष के आर्थिक दुष्प्रभावों को रेखांकित करते हुए कहा, “पूरी दुनिया इस वक्त जिस बदतर आर्थिक दौर से गुजर रही है, उसकी बुनियाद डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू ने ही रखी है। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और प्राकृतिक गैस का जो अभूतपूर्व और बड़ा संकट पैदा हुआ है, उसके लिए भी पूरी तरह ये दोनों नेता ही कसूरवार हैं।” ओवैसी ने आगे आरोप लगाया कि दुनिया के बाजारों का संतुलन बिगाड़ने में भी इन्हीं दोनों का हाथ है। अब वह समय आ चुका है जब इन दोनों नेताओं को वैश्विक हित में अपनी विनाशकारी और हिंसक गतिविधियों को तुरंत रोक देना चाहिए। ओवैसी ने साफ शब्दों में कहा कि चूंकि यह विनाशकारी युद्ध इन दोनों ने ही शुरू किया था, इसलिए इसे फौरन रोकना भी इन्हीं की जिम्मेदारी है।

पीएम मोदी से इजरायली कार्रवाई की कड़ी निंदा करने की अपील
एआईएमआईएम प्रमुख ने भारत के आंतरिक आर्थिक हालातों को वैश्विक परिस्थितियों से जोड़ते हुए कहा कि डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल की हरकतों की वजह से भारत समेत दुनिया भर के करोड़ों मध्यमवर्गीय और गरीब लोगों को भयंकर आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। उन्होंने भारतीय विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा, “मैं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पुरजोर अपील करता हूं कि बेंजामिन नेतन्याहू इस वक्त मध्य पूर्व में जो अमानवीय सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं, भारत सरकार को उसकी अंतरराष्ट्रीय मंच पर कड़ी और स्पष्ट निंदा करनी चाहिए।” इसके साथ ही उन्होंने पुरानी बातों को याद दिलाते हुए तंज कसा कि हमारे पीएम मोदी ने पूर्व में इजरायल की संसद में खड़े होकर खुले तौर पर यह कह दिया था कि भारत हर परिस्थिति में इजरायल के साथ खड़ा है, जो कि न्यायसंगत नहीं था।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी त्रिकोणीय संघर्ष की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पिछले एक लंबे समय से अमेरिका-इजरायल गठबंधन और ईरान के बीच बेहद हिंसक और कूटनीतिक संघर्ष चल रहा है, जिसका सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई चेन पर पड़ा है। इस तनाव को कम करने के लिए अतीत में अमेरिका और ईरान के बीच कई बार शांति समझौते की दिशा में सकारात्मक कदम भी बढ़ाए गए थे, लेकिन अंतिम समय में सहमति न बन पाने के कारण यह बातचीत कभी भी फाइनल मुकाम तक नहीं पहुंच पाई।
हालांकि, हाल ही में शुक्रवार को इस दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक प्रगति की खबर सामने आई थी। ईरान और अमेरिका दोनों ही देशों के शीर्ष अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के इस भयावह युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने का एक ऐतिहासिक समझौता अब पहले से कहीं ज़्यादा करीब पहुंच चुका है, जिससे दुनिया को जल्द राहत मिल सकती है।
अमेरिकी रियायतों की अफवाहों पर व्हाइट हाउस का स्पष्टीकरण
इसी कूटनीतिक हलचल के बीच शुक्रवार को अमेरिकी प्रशासन की ओर से एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी जारी किया गया था। अमेरिका ने उन तमाम मीडिया रिपोर्टों और दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि वाशिंगटन ने समझौते को अमलीजामा पहनाने के लिए तेहरान को बहुत बड़ी और अनुचित आर्थिक रियायतें दी हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इन बातों को पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन बताया। व्हाइट हाउस के अनुसार, इस शांति समझौते के नियम और शर्तें बेहद कड़े तरीके से इस प्रकार तैयार की गई हैं कि तेहरान को किसी भी प्रकार के आर्थिक या व्यापारिक फायदे तभी मिल सकेंगे, जब वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने किए गए अपने परमाणु और सैन्य वादों पर पूरी तरह अटल रहेगा और उन्हें समय सीमा के भीतर पूरा करेगा।
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