Ram Mandir Controversy : उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित भव्य राम मंदिर के दान पात्रों से कथित तौर पर धनराशि चोरी होने और इसको लेकर सोशल मीडिया व जनमानस में फैल रही विभिन्न अफवाहों पर अब विराम लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच कराने के लिए शासन स्तर पर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया गया है। दरअसल, राम मंदिर की देखरेख और प्रबंधन करने वाले ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ ने इस संवेदनशील मुद्दे पर फैल रहे भ्रम को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे हस्तक्षेप करने और एक विशेष टीम से इसकी जांच कराने का लिखित अनुरोध किया था। ट्रस्ट का मानना था कि मंदिर की पवित्रता और जनआस्था से जुड़े इस मामले पर अब चुप रहना ठीक नहीं है, क्योंकि अलग-अलग तरह की भ्रामक बातें समाज में गलत संदेश दे रही हैं।

तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय टीम करेगी जांच, 15 दिनों में सौंपनी होगी रिपोर्ट
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की इस गंभीर मांग को स्वीकार करते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने तुरंत एसआईटी (SIT) के गठन की आधिकारिक मंजूरी दे दी। इस विशेष जांच दल में शासन के तीन अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया है। टीम की कमान लखनऊ के मंडलायुक्त (IAS) विजय विश्वास पंत को सौंपी गई है, जबकि आईजी रेंज (IPS) किरन एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को इसका सदस्य बनाया गया है। यह उच्चस्तरीय समिति पूरे प्रकरण की बारीकी से जांच करेगी और अपनी शुरुआती यानी प्रारंभिक रिपोर्ट अगले 7 दिनों के भीतर शासन को सौंपेगी। वहीं, मामले की पूरी और विस्तृत अंतिम रिपोर्ट देने के लिए एसआईटी को कुल 15 दिनों का समय दिया गया है।

निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की उठी मांग
राम मंदिर ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने मुख्य रूप से तीन प्रमुख मांगें रखी थीं। ट्रस्ट का पहला अनुरोध था कि इस पूरे मामले की जांच किसी सामान्य एजेंसी के बजाय एक विशेष एसआईटी से कराई जाए, जो बिना किसी बाहरी दबाव या प्रभाव के निष्पक्षता से काम कर सके। दूसरा, जांच की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी रखा जाए ताकि देश-विदेश के करोड़ों राम भक्तों के मन में किसी भी प्रकार का संदेह न रहे। इसके साथ ही ट्रस्ट ने यह भी पुरजोर मांग की है कि इस जांच प्रक्रिया के बाद जो भी व्यक्ति, कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाया जाता है, उसके खिलाफ कानून के तहत कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में ऐसी किसी गड़बड़ी की पुनरावृत्ति न हो।
अयोध्या और राम मंदिर हमेशा से रही है योगी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
धार्मिक और प्रशासनिक हलकों में यह बात जगजाहिर है कि उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार और खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या तथा प्रभु श्री राम के मंदिर से बेहद गहरा और आत्मीय जुड़ाव रहा है। अयोध्या का सर्वांगीण विकास और राम मंदिर की सुरक्षा व व्यवस्था बनाए रखना योगी सरकार की सबसे पहली प्राथमिकताओं में गिना जाता है। चूंकि किसी भी बड़े मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन करने का वैधानिक अधिकार पूरी तरह राज्य सरकार के पास सुरक्षित होता है, यही मुख्य वजह थी कि ट्रस्ट ने बिना किसी देरी के सीधे मुख्यमंत्री से संपर्क साधा और उनसे इस मामले में त्वरित न्यायोचित निर्णय लेने का आग्रह किया।
बैंक के स्टाफ पर गड़बड़ी का शक, पूर्व में भी सामने आई थीं शिकायतें
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कैंप कार्यालय के प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने इस पूरे मामले की अंदरूनी परतें खोलते हुए कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी दान संग्रह में कुछ विसंगतियां और गड़बड़ी पाई गई थीं, जिसकी सूचना ट्रस्ट को दी गई थी, लेकिन उस समय कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका। प्रकाश गुप्ता के अनुसार, पहले दान के पैसे को इकट्ठा करने और उसे सुरक्षित बैंक भेजने की पूरी व्यवस्था अलग थी, जिसे बाद में बदल दिया गया।
पहले कैश काउंटर पर आने वाला सारा दान ट्रस्ट के अधिकृत अधिकारियों के पास जमा होता था और वहां से उसे सीधे बैंक भेजा जाता था। लेकिन बाद में नई व्यवस्था के तहत बैंक ने अपना काउंटर मंदिर परिसर के अंदर ही स्थापित कर दिया और वहां अपना स्थाई स्टाफ तैनात कर दिया। अब कैश गिनने और उसे संभालने वाले लोग पूरी तरह बैंक द्वारा ही नियुक्त किए जाते थे। प्रभारी ने स्पष्ट रूप से आशंका जताई है कि कैश संभालने वाले इन्हीं बैंक कर्मियों द्वारा ही कथित तौर पर हेरफेर या गड़बड़ी को अंजाम दिया गया है।
उन्होंने पूर्व कर्मचारी महिपाल सिंह का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए बताया कि महिपाल ने सबसे पहले इस वित्तीय गड़बड़ी को पकड़ा था और इसकी पूरी जानकारी ट्रस्ट के शीर्ष अधिकारियों को भी दी थी। परंतु, जब उनकी इस शिकायत पर तत्कालीन समय में कोई त्वरित या बड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो महिपाल सिंह निराश होकर वापस अपने गृह राज्य कोटा (राजस्थान) लौट गए। अब एसआईटी इन सभी कड़ियों को जोड़कर सच्चाई सामने लाएगी।
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