Owaisi Reaction
Owaisi Reaction: देश की राजधानी दिल्ली में 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए दुर्भाग्यपूर्ण धमाके में 13 लोगों की जान चली गई, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस दर्दनाक घटना पर, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सीधे तौर पर आतंकी मानसिकता पर हमला करते हुए कहा कि कुछ लोग इतने ज़ालिम (अत्याचारी) हैं कि वे मदरसे या स्कूल के लिए एक कमरा तक नहीं बना सकते, फिर भी अमोनियम नाइट्रेट जैसे विस्फोटक सामग्री लेकर बैठे हैं। यह टिप्पणी उन तत्वों पर सीधा निशाना साधती है जो रचनात्मकता के बजाय विनाशकारी गतिविधियों में शामिल हैं।
ओवैसी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वतन की मोहब्बत और राष्ट्रवाद के संदर्भ में मुसलमानों की भूमिका को स्पष्ट किया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जब हम देशप्रेम की बात करते हैं, तो मुसलमानों ने शिक्षा (तालीम) और आदर्शों के जो संस्थान स्थापित किए हैं, अगर कोई व्यक्ति उसी शिक्षा की आड़ में या उसके नाम पर बैठकर बम बनाने जैसी खतरनाक साज़िश करता है, तो हम उसकी भी कड़ी निंदा (मज़म्मत) करते हैं। ओवैसी ने एक स्पष्ट संदेश देते हुए कहा, “जो मुल्क का दुश्मन है, वह हमारा भी दुश्मन है।” यह बयान आतंकवाद को धार्मिक पहचान से अलग करते हुए, उसे केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में देखता है।
AIMIM प्रमुख ने चेतावनी दी कि यदि इस प्रकार की हिंसक और आतंकवादी हरकतें जारी रहीं तो देश के हालात और भी खराब हो सकते हैं। इसके साथ ही, उन्होंने एक खास वर्ग की मानसिकता पर भी प्रहार किया। ओवैसी ने कहा कि कुछ लोग यह भ्रम पाले हुए हैं कि मुसलमानों को देश में दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया जाएगा। उन्होंने इस सोच को उनकी भूल करार देते हुए दृढ़ता से कहा कि न तो मुसलमान खत्म होंगे और न ही उनकी पहचान मिटाई जा सकती है। ओवैसी का यह बयान समुदाय के आत्मविश्वास और संवैधानिक अधिकारों के प्रति उनके भरोसे को दर्शाता है।
ओवैसी ने दिल्ली हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि इस हमले में हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदाय के लोग मारे गए हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। उन्होंने अपनी मस्जिदों को बचाने की बात दोहराई और एक भावनात्मक और वैचारिक चुनौती पेश करते हुए कहा कि “तुम एक मस्जिद को शहीद करोगे तो हम लाखों मस्जिदों को आबाद करेंगे।” इसके अलावा, उन्होंने शरीयत पर हमला न करने की बात भी कही।
अयोध्या मामले के संदर्भ में, ओवैसी ने कोर्ट के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया याद दिलाई। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने भले ही आस्था के नाम पर मस्जिद नहीं दिए जाने का फैसला सुनाया हो, लेकिन उनके समुदाय ने हमेशा न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया। उन्होंने सवाल उठाया, “मस्जिद के खिलाफ फैसला आया तो हमने क्या कोर्ट में जज पर जूता फेंका था?” इस कथन के माध्यम से उन्होंने मुसलमानों के कानून के राज में अटूट विश्वास को उजागर किया। अंत में, उन्होंने भारतीय संविधान और वतन को मजबूत बनाने पर जोर दिया और कहा, “अगर तुम मुसलमान को दबा रहे तो तुम भारत को कमजोर कर रहे हो।” उन्होंने अपने बुजुर्गों की अज़ीम कुर्बानियों को याद करते हुए देश को और मजबूत बनाने का आह्वान किया।
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