Pak-Taliban War
Pak-Taliban War: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से चली आ रही तनातनी अब एक ऐसे मोड़ पर पहुँच गई है, जहाँ शांति और कूटनीति के रास्ते लगभग बंद नज़र आ रहे हैं। हाल ही में पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा अफगान सीमा के भीतर की गई एयरस्ट्राइक ने काबुल में बैठी तालिबान सरकार को हिला कर रख दिया है। तालिबान के मुख्य प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने इस हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इस्लामाबाद को चेतावनी दी है कि वे इस उकसावे वाली कार्रवाई को चुपचाप सहन नहीं करेंगे। मुजाहिद का यह बयान साफ़ संकेत देता है कि आने वाले समय में दक्षिण एशिया का यह हिस्सा एक भीषण सैन्य संघर्ष का गवाह बन सकता है।
तनाव की तात्कालिक वजह 21 और 22 फरवरी 2026 की दरमियानी रात को पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए हवाई हमले हैं। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में संदिग्ध आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। हालांकि, अफगानिस्तान का दावा पाकिस्तान के दावों से बिल्कुल विपरीत है। काबुल प्रशासन के अनुसार, इन हमलों में आतंकियों के बजाय आम नागरिकों को निशाना बनाया गया, जिसमें महिलाओं और बच्चों समेत करीब 19 बेगुनाह लोगों की जान चली गई है। इस घटना ने अफगान जनता और तालिबान नेतृत्व में पाकिस्तान के खिलाफ भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने एक हालिया साक्षात्कार में स्पष्ट कर दिया है कि अब बातचीत का समय बीत चुका है। जब उनसे संभावित प्रतिक्रिया के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसे सीधे तौर पर “सैन्य कदम” करार दिया। मुजाहिद ने कहा कि यह मामला अब केवल राजनीतिक मेजों या कागजी चर्चाओं तक सीमित नहीं रहने वाला है। अफगान प्रवक्ता ने अपनी जवाबी योजना को फिलहाल “गोपनीय” रखा है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान को इस “शर्मनाक कृत्य” का करारा जवाब जल्द ही मिल जाएगा। उनके इस सख्त तेवर से सीमा पर हाई-अलर्ट जैसी स्थिति पैदा हो गई है।
इस्लामिक अमीरात (तालिबान) ने इस हमले को अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता का घोर उल्लंघन माना है। उनका कहना है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का सम्मान करने में विफल रहा है। दूसरी ओर, पाकिस्तान का दावा है कि उसकी एयरस्ट्राइक में ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ (TTP) के 70 से अधिक खूंखार आतंकवादी मारे गए हैं, जो अफगान धरती का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ कर रहे थे। दोनों देशों के बीच दावों का यह बड़ा अंतर कूटनीतिक जटिलता को और बढ़ा रहा है। अफगानिस्तान अब अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार दिख रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि काबुल और इस्लामाबाद के बीच युद्ध जैसी स्थिति पैदा होती है, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है, लेकिन फिलहाल कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच भारी डर का माहौल है और अफगान सैनिक किसी भी संभावित घुसपैठ का मुकाबला करने के लिए मोर्चे पर तैनात हो चुके हैं। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि यह विवाद बातचीत से सुलझेगा या फिर गोलियों की गूँज इस क्षेत्र की शांति को पूरी तरह नष्ट कर देगी।
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