Pakistan Economic Crisis : पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर युद्ध और उग्रवाद की छाया गहराती जा रही है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, पांच मध्य एशियाई देशों—कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज़्बेकिस्तान—के साथ पाकिस्तान के व्यापार में बड़ा असंतुलन देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2024-25 में पाकिस्तान का इन देशों को निर्यात 31.63% घट गया।
पिछले वित्त वर्ष (2023-24) में पाकिस्तान ने इन देशों को कुल 2.49 अरब टका मूल्य का सामान भेजा था, जो अब 1.7 अरब रुपये की गिरावट के साथ काफी नीचे आ गया है। इसके उलट, आयात में लगभग चार गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे व्यापार घाटा और गहरा गया है।
व्यक्तिगत देशों के आंकड़े और भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। पाकिस्तान से कज़ाकिस्तान को होने वाला निर्यात 47% घट गया, जबकि कज़ाकिस्तान अब तक पाकिस्तान का प्रमुख व्यापारिक भागीदार रहा है। उज़्बेकिस्तान को निर्यात 18.17% कम हुआ है। हालांकि, तुर्कमेनिस्तान और ताजिकिस्तान को होने वाले निर्यात में हल्की वृद्धि देखी गई है, लेकिन यह समग्र गिरावट की भरपाई करने में नाकाफी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में पाकिस्तान ने इन पांच देशों से 414 अरब रुपये का माल आयात किया था। लेकिन 2024-25 में यह आंकड़ा 2.11 अरब रुपये की वृद्धि के साथ और भी अधिक हो गया है। इसका सीधा असर देश के विदेशी मुद्रा भंडार और आर्थिक स्थिरता पर पड़ा है।
इस संकट के बीच पाकिस्तान ने अपना रक्षा बजट भी बढ़ा दिया है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद इस्लामाबाद ने चीन से आधुनिक हथियारों की खरीद पर ज़ोर देना शुरू किया है। रक्षा क्षेत्र में भारी निवेश का बोझ भी अर्थव्यवस्था को डुबो रहा है।
इस बिगड़ती आर्थिक स्थिति का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। देश के वे मेहनतकश लोग, जिनका न युद्ध से कोई वास्ता है न उग्रवाद से, अब महंगाई, बेरोज़गारी और ज़रूरी वस्तुओं की कमी का सामना कर रहे हैं। सरकार के युद्ध-केंद्रित दृष्टिकोण और विदेश नीति के चलते व्यापारिक साझेदारों से संबंध बिगड़ते जा रहे हैं, जिसका खामियाज़ा देश के आर्थिक ताने-बाने को भुगतना पड़ रहा है।
मध्य एशियाई देशों के साथ व्यापार में भारी गिरावट और रक्षा खर्च में वृद्धि ने पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। निर्यात में 31% की कमी और आयात में भारी इज़ाफा देश को गंभीर व्यापार घाटे की ओर धकेल रहा है। युद्ध और उग्रवाद की नीतियों ने पाकिस्तान को आर्थिक अंधकार में झोंक दिया है, और इसका सबसे बड़ा नुकसान आम नागरिकों को हो रहा है।
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