Pakistan Fuel Price Drop
Pakistan Fuel Price Drop: इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली ऐतिहासिक शांति वार्ता से ठीक पहले पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने अपनी जनता को एक बड़ी आर्थिक राहत दी है। देश में बढ़ती महंगाई और आसमान छूती ईंधन की कीमतों से परेशान नागरिकों के लिए यह खबर किसी मरहम से कम नहीं है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी कमी करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।
शहबाज सरकार द्वारा जारी नए आदेश के मुताबिक, पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में 12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में रिकॉर्ड 135 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है। इस बड़े बदलाव के बाद अब पाकिस्तान में डीजल का नया रेट 385 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जो पहले 520 रुपये के स्तर पर था। वहीं, पेट्रोल की कीमत भी 458 रुपये से घटकर अब 446 रुपये प्रति लीटर पर आ गई है। डीजल की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट से माल ढुलाई और कृषि क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
ईंधन की कीमतों में इस उतार-चढ़ाव की जड़ें फरवरी 2026 के संघर्ष में छिपी हैं। जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की, तो जवाब में ईरान ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया था। इसके परिणामस्वरूप अरब देशों से होने वाली कच्चे तेल की वैश्विक सप्लाई ठप हो गई। तेल की किल्लत और आपूर्ति बाधित होने के कारण पाकिस्तान में ऊर्जा संकट गहरा गया था, जिससे मजबूरन सरकार को दाम 500 रुपये के पार ले जाने पड़े थे।
इस्लामाबाद में आज होने वाली शांति वार्ता से पहले प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद इन नई कीमतों की घोषणा की। सरकार का तर्क है कि कीमतों में यह कटौती देश की डगमगाती अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए जरूरी थी। पाकिस्तान इस समय भीषण महंगाई के दौर से गुजर रहा है, जहाँ आम आदमी के लिए बुनियादी जरूरतें पूरी करना कठिन हो गया है। ईंधन सस्ता होने से परिवहन लागत कम होगी, जिसका सीधा असर खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इन दिनों अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी सक्रियता को लेकर काफी चर्चा में हैं। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया ‘सीजफायर’ (संघर्ष विराम) का श्रेय खुद को और अपनी कूटनीति को दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शैली अपनाते हुए शहबाज शरीफ अब दोनों देशों के बीच होने वाली शांति वार्ता की मेजबानी का भी गौरव गान कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच एक स्थायी शांति समझौता संभव हो पाएगा।
शहबाज शरीफ ने इस शांति वार्ता को न केवल पाकिस्तान की उपलब्धि बताया, बल्कि इसे पूरे मुस्लिम समाज के लिए एक “गर्व का पल” करार दिया है। उनका मानना है कि पाकिस्तान की मेजबानी में दो वैश्विक शक्तियों का एक मेज पर आना इस्लामी जगत की बढ़ती कूटनीतिक शक्ति का प्रतीक है। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि घरेलू मोर्चे पर अपनी गिरती लोकप्रियता को बचाने के लिए शहबाज सरकार इन कूटनीतिक जीत और तेल की कीमतों में कटौती का सहारा ले रही है।
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