Asim Munir Pakistan army: पाकिस्तान ने आतंकवाद को बढ़ावा देकर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है। दशकों से धर्म के नाम पर लोगों को भड़काने और आतंक को सहारा देने वाली नीतियों ने देश को कंगाली और अव्यवस्था के रास्ते पर खड़ा कर दिया है। इसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी वहां की सरकार और सेना के शीर्ष अधिकारियों की है। मौजूदा हालात में पाकिस्तान की रणनीति दो स्तंभों पर टिकी है—आर्मी और एटम बम। इसके अलावा, अमेरिका और चीन की नजदीकी से उसे अस्थायी सहारा मिलता दिख रहा है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि यह रास्ता पाकिस्तान को और गहरी खाई में धकेल सकता है और भारत के लिए भी नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।

बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली में फंसा पाकिस्तान
पाकिस्तान के युवा आज बेरोजगारी के दलदल में फंसे हुए हैं। विदेशी निवेश न के बराबर है और महंगाई चरम पर है। पेट्रोल-डीजल और खाद्य पदार्थों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान की सरकार और सेना अपने नागरिकों का ध्यान असल मुद्दों से हटाकर भारत-विरोध और धार्मिक कट्टरता की तरफ मोड़ने का काम कर रही है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद अमेरिका से बढ़ी नजदीकी
पिछले दिनों कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया था, जिससे पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसके बावजूद पाकिस्तान अपनी आतंक समर्थक नीति से पीछे हटने को तैयार नहीं है। इस बीच, पाकिस्तान आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर दो बार अमेरिका का दौरा कर चुके हैं। माना जा रहा है कि दोनों देशों की नजदीकी बढ़ रही है। अमेरिका और भारत के बीच हाल के महीनों में रिश्तों में खटास आई है, और इसका फायदा पाकिस्तान उठा रहा है। अमेरिका, पाकिस्तान को रणनीतिक साझेदार के तौर पर फिर से देखने लगा है। इससे भारत के लिए सुरक्षा चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
आसिम मुनीर का भड़काऊ एजेंडा
पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर लगातार भारत के खिलाफ जहर उगलते नजर आए हैं। उनके भाषणों का असर पाकिस्तान के युवाओं पर भी पड़ रहा है। बेरोजगारी और आर्थिक संकट से जूझ रहे युवा भारत-विरोध की राह पर भटक रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रवृत्ति पाकिस्तान को बर्बादी की ओर धकेल रही है।चीन और पाकिस्तान का रिश्ता पुराना और मजबूत माना जाता है। इन दिनों चीन के विदेश मंत्री वांग यी पाकिस्तान दौरे पर हैं। दोनों देशों की बैठक में रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने पर सहमति बनी है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) पहले से ही चीन को पाकिस्तान में बड़ा प्रभाव दे रहा है। अब अगर अमेरिका भी पाकिस्तान के करीब आता है तो भारत को दोहरी कूटनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
आतंकवाद की राह और भविष्य की तबाही
पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह आतंकवाद का रास्ता छोड़ने को तैयार नहीं है। यह नीति उसके ही लिए आत्मघाती साबित हो रही है। आतंकवाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी छवि खराब हुई है, निवेशक दूर भाग रहे हैं और आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। इसके बावजूद सेना और नेता जनता का ध्यान भटकाने के लिए भारत-विरोधी नफरत फैलाने से बाज नहीं आ रहे।
पाकिस्तान आज जिस रणनीति पर चल रहा है, वह अल्पकालिक फायदे जरूर दिला सकती है, लेकिन दीर्घकाल में यही उसके लिए आत्मघाती साबित होगी। आसिम मुनीर की भड़काऊ नीतियां, अमेरिका-चीन की मदद पर निर्भरता और आतंकवाद का सहारा पाकिस्तान को आर्थिक व सामाजिक तबाही की ओर ले जा रहा है। वहीं, भारत को पाकिस्तान की इन गतिविधियों पर चौकन्ना रहना होगा, क्योंकि उसकी यह रणनीति पड़ोसी देशों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है।
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