Parliament security breach: संसद सुरक्षा में बड़ी चूक, दीवार फांदकर घुसा शख्स, पूछताछ जारी

Parliament security breach: भारतीय संसद की सुरक्षा में एक बार फिर बड़ी सेंध लगी है। शुक्रवार सुबह लगभग साढ़े 6 बजे एक अज्ञात शख्स रेल भवन की तरफ से पेड़ पर चढ़कर दीवार फांदते हुए संसद भवन के अंदर घुस गया। जानकारी के अनुसार, वह गरुड़ द्वार तक पहुंच गया था। संसद परिसर की सुरक्षा में मौजूद जवानों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को दबोच लिया। फिलहाल उससे पूछताछ जारी है कि उसने ऐसा कदम क्यों उठाया। सुरक्षा एजेंसियां उसकी पहचान की पुष्टि करने की कोशिश कर रही हैं।

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संसद सुरक्षा में लगातार सेंध की घटनाएं

संसद भवन को देश की सबसे सुरक्षित इमारतों में गिना जाता है, लेकिन यहां सुरक्षा चूक के मामले बार-बार सामने आते रहे हैं। हाल ही में दिसंबर 2023 में संसद की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई थी, जब 6 लोग संसद के अंदर घुसने में सफल हो गए थे।

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2023 का स्मोक कैन हमला

13 दिसंबर 2023 को संसद पर हुए आतंकी हमले की बरसी पर 6 लोगों ने संसद सुरक्षा में सेंध लगाई थी। सागर शर्मा और मनोरंजन नामक युवक दर्शक दीर्घा तक पहुंच गए और जूतों में छिपाए गए स्मोक कैन से पीला धुआं छोड़ दिया। वहीं, अमोल शिंदे और नीलम आजाद संसद भवन के बाहर धुआं फैलाकर नारेबाजी कर रहे थे।

इस पूरे घटनाक्रम का मास्टरमाइंड ललित झा और महेश कुमावत को बताया गया। हालांकि ललित झा फरार हो गया था। दिल्ली पुलिस ने पांचों आरोपियों को गिरफ्तार किया और उन पर गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया। इस घटना के बाद सीआरपीएफ के महानिदेशक अनीश दयाल सिंह के नेतृत्व में जांच समिति गठित की गई। नतीजतन, लोकसभा सचिवालय ने 8 सुरक्षाकर्मियों को निलंबित किया और सांसदों के निजी सहायकों की एंट्री पर रोक लगा दी गई।

2001 का आतंकी हमला

संसद भवन पर सबसे बड़ा हमला 13 दिसंबर 2001 को हुआ था। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के पांच आतंकियों ने गृह मंत्रालय की फर्जी कार का इस्तेमाल कर संसद में प्रवेश किया। सभी आतंकी भारी हथियारों से लैस थे। इस हमले में दिल्ली पुलिस के 5 जवान, एक CRPF कर्मी, संसद सुरक्षा के 2 गार्ड और एक माली शहीद हुए। हालांकि भारतीय सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई में सभी पांचों आतंकियों को ढेर कर दिया था। इस हमले के बाद संसद भवन की सुरक्षा प्रणाली को पूरी तरह से बदल दिया गया और ID कार्ड आधारित एंट्री सिस्टम लागू किया गया।

1974 की घटना

संसद सुरक्षा में सेंध का एक और मामला 11 अप्रैल 1974 को सामने आया था। प्रेम पाल सिंह नामक व्यक्ति दर्शक दीर्घा से कूदकर तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव तक पहुंच गया और नारेबाजी करने लगा। बाद में पता चला कि आरोपी को प्रवेश पास तत्कालीन कांग्रेस सांसद हरि किशोर सिंह के जरिए मिला था। इस घटना के बाद संसद की दर्शक दीर्घा की निगरानी और कड़ी कर दी गई थी।

सवालों के घेरे में संसद की सुरक्षा

बार-बार हो रही इन घटनाओं ने संसद भवन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संसद भवन में तैनात CRPF, दिल्ली पुलिस और लोकसभा सचिवालय सुरक्षा की तैनाती के बावजूद ऐसे मामले सामने आना चिंता का विषय है। शुक्रवार सुबह पकड़े गए अज्ञात शख्स से पूछताछ जारी है, लेकिन यह घटना साबित करती है कि संसद भवन की सुरक्षा व्यवस्था में अब भी गंभीर खामियां हैं। साल 1974, 2001, 2023 और अब 2025 में बार-बार सामने आ रहे ये मामले साफ करते हैं कि संसद भवन को लेकर सुरक्षा प्रोटोकॉल को और कड़ा करने की जरूरत है।

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