Pakistan US relations: पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए म्युचुअल डिफेंस पैक्ट पर उठते सवालों के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस रक्षा समझौते के लिए किसी तीसरे पक्ष, विशेषकर अमेरिका, से अनुमति लेने या उसे विश्वास में लेने की कोई जरूरत नहीं थी।
ख्वाजा आसिफ ने यह टिप्पणी उस सवाल के जवाब में की, जिसमें पूछा गया था कि क्या इस समझौते से पहले अमेरिका को जानकारी दी गई थी। उन्होंने कहा, “यह एक रक्षात्मक व्यवस्था है, न कि किसी प्रभुत्व स्थापित करने की कोशिश। हमारे पास किसी की जमीन पर कब्जा करने या हमला करने की कोई योजना नहीं है।”
क्या है पाकिस्तान-सऊदी डिफेंस पैक्ट?
17 सितंबर 2025 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने इस रणनीतिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत, यदि किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। यह डील दोनों देशों की सुरक्षा और सहयोग को नई मजबूती देती है।
यह समझौता उस वक्त सामने आया है जब हाल ही में कतर में हमास नेतृत्व पर इजराइली हमले हुए हैं। यह क्षेत्रीय तनाव के बीच अमेरिका के सहयोगियों के बीच बढ़ते सुरक्षा गठजोड़ की ओर इशारा करता है।
अमेरिका को लेकर क्यों बोले ख्वाजा आसिफ?
अमेरिका और सऊदी अरब के ऐतिहासिक संबंधों को देखते हुए, यह स्वाभाविक था कि पाकिस्तान से पूछा जाए कि क्या इस डील को लेकर वाशिंगटन को भरोसे में लिया गया था। ख्वाजा आसिफ ने दो टूक कहा कि “हमें किसी तीसरे देश की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं।” यह बयान अमेरिका को स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि पाकिस्तान अपनी विदेश नीति में स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार रखता है।
अफगानिस्तान पर भी तीखी टिप्पणी
आसिफ ने अफगानिस्तान को लेकर भी कड़ा रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि काबुल की सरकार निर्दोष नहीं है और वहां से संचालित आतंकी गुट पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम अफगानिस्तान के साथ दो युद्धों में उलझे रहे, दोनों बार अमेरिका चला गया, लेकिन हम आज भी उसके परिणाम भुगत रहे हैं – चाहे वो तालिबान हो, टीटीपी या बीएलए।”
क्या अरब देश अफगान आक्रामकता का देंगे जवाब?
इस सवाल पर कि क्या सऊदी अरब जैसे अरब देश पाकिस्तान के साथ मिलकर अफगानिस्तान की आक्रामकता का जवाब देंगे, ख्वाजा आसिफ ने कहा कि उन्हें इसमें कोई आपत्ति नहीं होगी। इससे स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान अपने सुरक्षा हितों को लेकर अब अधिक आक्रामक और मुखर रुख अपना रहा है।
पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौता क्षेत्रीय भू-राजनीति में एक नया मोड़ है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री द्वारा अमेरिका को लेकर दिया गया बयान यह दिखाता है कि पाकिस्तान अब आत्मनिर्भर विदेश नीति की ओर बढ़ रहा है। वहीं, अफगानिस्तान को लेकर दी गई चेतावनी आने वाले समय में दक्षिण एशिया में सुरक्षा समीकरण को और अधिक जटिल बना सकती है।
Read More : India US trade talks :भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में प्रगति, टैरिफ विवाद पर बातचीत जारी, विदेश मंत्रालय ने बड़ा अपडेट दिया
Pakistan US relations :अमेरिका पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का बड़ा बयान, ‘ किसी तीसरे देश से पूछने की जरूरत नहीं थी’
Pakistan US relations: पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए म्युचुअल डिफेंस पैक्ट पर उठते सवालों के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस रक्षा समझौते के लिए किसी तीसरे पक्ष, विशेषकर अमेरिका, से अनुमति लेने या उसे विश्वास में लेने की कोई जरूरत नहीं थी।
ख्वाजा आसिफ ने यह टिप्पणी उस सवाल के जवाब में की, जिसमें पूछा गया था कि क्या इस समझौते से पहले अमेरिका को जानकारी दी गई थी। उन्होंने कहा, “यह एक रक्षात्मक व्यवस्था है, न कि किसी प्रभुत्व स्थापित करने की कोशिश। हमारे पास किसी की जमीन पर कब्जा करने या हमला करने की कोई योजना नहीं है।”
क्या है पाकिस्तान-सऊदी डिफेंस पैक्ट?
17 सितंबर 2025 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने इस रणनीतिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत, यदि किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। यह डील दोनों देशों की सुरक्षा और सहयोग को नई मजबूती देती है।
यह समझौता उस वक्त सामने आया है जब हाल ही में कतर में हमास नेतृत्व पर इजराइली हमले हुए हैं। यह क्षेत्रीय तनाव के बीच अमेरिका के सहयोगियों के बीच बढ़ते सुरक्षा गठजोड़ की ओर इशारा करता है।
अमेरिका को लेकर क्यों बोले ख्वाजा आसिफ?
अमेरिका और सऊदी अरब के ऐतिहासिक संबंधों को देखते हुए, यह स्वाभाविक था कि पाकिस्तान से पूछा जाए कि क्या इस डील को लेकर वाशिंगटन को भरोसे में लिया गया था। ख्वाजा आसिफ ने दो टूक कहा कि “हमें किसी तीसरे देश की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं।” यह बयान अमेरिका को स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि पाकिस्तान अपनी विदेश नीति में स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार रखता है।
अफगानिस्तान पर भी तीखी टिप्पणी
आसिफ ने अफगानिस्तान को लेकर भी कड़ा रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि काबुल की सरकार निर्दोष नहीं है और वहां से संचालित आतंकी गुट पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम अफगानिस्तान के साथ दो युद्धों में उलझे रहे, दोनों बार अमेरिका चला गया, लेकिन हम आज भी उसके परिणाम भुगत रहे हैं – चाहे वो तालिबान हो, टीटीपी या बीएलए।”
क्या अरब देश अफगान आक्रामकता का देंगे जवाब?
इस सवाल पर कि क्या सऊदी अरब जैसे अरब देश पाकिस्तान के साथ मिलकर अफगानिस्तान की आक्रामकता का जवाब देंगे, ख्वाजा आसिफ ने कहा कि उन्हें इसमें कोई आपत्ति नहीं होगी। इससे स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान अपने सुरक्षा हितों को लेकर अब अधिक आक्रामक और मुखर रुख अपना रहा है।
पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौता क्षेत्रीय भू-राजनीति में एक नया मोड़ है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री द्वारा अमेरिका को लेकर दिया गया बयान यह दिखाता है कि पाकिस्तान अब आत्मनिर्भर विदेश नीति की ओर बढ़ रहा है। वहीं, अफगानिस्तान को लेकर दी गई चेतावनी आने वाले समय में दक्षिण एशिया में सुरक्षा समीकरण को और अधिक जटिल बना सकती है।
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