Palani Murugan Temple : तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले के पलनी में स्थित प्रसिद्ध श्री दंडायुथापाणी स्वामी मंदिर ने दान संग्रह के मामले में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। भगवान कार्तिकेय को समर्पित यह मंदिर अपनी भव्यता और धार्मिक महत्व के लिए विश्वभर में जाना जाता है। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, मंदिर को प्राप्त होने वाले वार्षिक चढ़ावे ने अपने ही पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। मंदिर की कुल सालाना आय अब 61 करोड़ 21 लाख 95 हजार 387 रुपये तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष के 58 करोड़ 28 लाख 51 हजार 525 रुपये के रिकॉर्ड से कहीं अधिक है। यह वृद्धि मंदिर के प्रति भक्तों की अटूट श्रद्धा और बढ़ती आस्था का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

दान गणना की पारदर्शी और व्यापक प्रक्रिया
मंदिर के दान-पात्र (हुंडी) की गणना एक बेहद व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से पूरी की गई। इस प्रक्रिया में मंदिर के प्रशासनिक अधिकारियों, बैंक के कर्मचारियों, समाजसेवकों, कॉलेज के विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों की एक बड़ी टीम शामिल रही। इस सामूहिक प्रयास ने यह सुनिश्चित किया कि भक्तों द्वारा अर्पित की गई हर राशि और मूल्यवान वस्तु का सटीक हिसाब रखा जा सके। केवल नकद राशि के रूप में ही मंदिर को 1 करोड़ 40 लाख 575 रुपये प्राप्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त, दान में बड़ी मात्रा में बहुमूल्य वस्तुएं भी मिली हैं, जिनमें 187.200 ग्राम सोना, 4 किलो 35 ग्राम चांदी और 255 विदेशी मुद्रा के सिक्के शामिल हैं।

लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र: पलनी मंदिर
शिवगिरि पहाड़ी की चोटी पर स्थित श्री दंडायुथापाणी स्वामी मंदिर देश के सबसे समृद्ध और प्रतिष्ठित हिंदू मंदिरों में से एक है। यहां साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, विशेष रूप से तमिल नव वर्ष, थाई पूसम और पंगुनी उथिरम जैसे त्योहारों के अवसर पर लाखों की संख्या में भक्त भगवान मुरुगन के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इन अवसरों पर भक्त दिल खोलकर दान करते हैं, जो मंदिर के विकास और सामुदायिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भक्तों की बढ़ती संख्या ही इस ऐतिहासिक आय का मुख्य आधार है।
पिछले वर्ष की तुलना में लगभग तीन करोड़ की वृद्धि
मंदिर प्रशासन द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष की कुल आय में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 2 करोड़ 93 लाख 43 हजार 862 रुपये की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह उपलब्धि न केवल मंदिर की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि आने वाले समय में मंदिर प्रबंधन और भी अधिक भव्य तरीके से धार्मिक आयोजनों और जनहित के कार्यों को संचालित कर सकेगा। मंदिर के इतिहास में यह अब तक का सबसे अधिक वार्षिक दान संग्रह है, जिसे एक बड़ी प्रशासनिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
प्रबंधन ने भक्तों की आस्था को दिया सफलता का श्रेय
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मंदिर प्रबंधन ने संतोष व्यक्त करते हुए इसका संपूर्ण श्रेय भक्तों को दिया है। अधिकारियों ने कहा कि यह वृद्धि भगवान मुरुगन में श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का परिणाम है। मंदिर प्रबंधन का मानना है कि श्रद्धालुओं द्वारा प्रदान किया गया यह दान मंदिर के रख-रखाव, दर्शन व्यवस्था को सुगम बनाने और समाज कल्याण की योजनाओं को गति प्रदान करने में पूरी तरह उपयोग किया जाएगा। पलनी मंदिर की यह सफलता पूरे देश में धर्मस्थलों के प्रबंधन और भक्तों के जुड़ाव का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करती है।
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