Paramhans Acharya:
Paramhans Acharya: देशभर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर मचे बवाल के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक हस्तक्षेप किया है। बीते गुरुवार को शीर्ष अदालत ने विवादित प्रावधानों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी को सख्त निर्देश दिया कि वे इन नियमों की समीक्षा के लिए एक विशेष समिति का गठन करें। जहाँ एक ओर कानूनी गलियारों में इस फैसले की चर्चा है, वहीं दूसरी ओर अयोध्या के जगतगुरु परमहंस आचार्य ने इस मामले में ‘वशीकरण’ का एंगल जोड़कर सोशल मीडिया पर सनसनी फैला दी है।
परमहंस आचार्य ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि यूजीसी के विवादास्पद नियम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मर्जी से नहीं, बल्कि उन पर किए गए ‘तंत्र-मंत्र’ के प्रभाव के कारण बने थे। आचार्य के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी पर वशीकरण का प्रयोग किया था, ताकि भारत में अस्थिरता पैदा करने वाले कानून बनाए जा सकें। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि उनके द्वारा अयोध्या में किए गए विशेष वैदिक अनुष्ठानों और मंत्रोच्चार के कारण ही यह वशीकरण अब भंग हो गया है, जिसके फलस्वरूप सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आया।
मीडिया से रूबरू होते हुए परमहंस आचार्य ने बताया कि उन्हें इन नियमों में कोई तर्क नजर नहीं आ रहा था। उन्होंने दावा किया कि इस विषय पर उनकी बात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी हुई थी। आचार्य के मुताबिक, राजनाथ सिंह ने संकेत दिया था कि पीएम मोदी के बढ़ते वैश्विक प्रभाव से विदेशी ताकतें जलती हैं और उन्हें कमजोर करने के लिए तंत्र-मंत्र का सहारा ले सकती हैं। आचार्य ने कहा कि जब उन्होंने ध्यान लगाया, तो उन्हें पता चला कि इस कृत्य के पीछे डोनाल्ड ट्रंप का हाथ था।
बता दें कि यूजीसी के इन नियमों पर परमहंस आचार्य पहले भी काफी मुखर रहे हैं। उन्होंने इन प्रावधानों को हिंदू समाज को बांटने वाली साजिश करार दिया था। आचार्य का मानना था कि यदि ये नियम लागू होते, तो देश में गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा हो जाते और इससे महिलाओं के सम्मान को भी ठेस पहुँचती। उन्होंने राजनीतिक चेतावनी देते हुए कहा था कि इन नियमों के कारण भाजपा का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है और यदि सरकार ने इन्हें वापस नहीं लिया, तो वे स्वयं ‘इच्छामृत्यु’ का मार्ग चुनेंगे।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियमों पर रोक लगाए जाने के बाद आचार्य के तेवर थोड़े नरम पड़े हैं। उन्होंने कहा, ‘अब जब वशीकरण का असर खत्म हो गया है, तो हमें उम्मीद है कि मोदी जी भविष्य में ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे जिससे देश का विकास रुके।’ उन्होंने बिहार चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर ये नियम पहले लागू होते, तो भाजपा की करारी हार निश्चित थी। अब आचार्य ने प्रधानमंत्री की कुशलता और बेहतर स्वास्थ्य के लिए अयोध्या में निरंतर पूजा और हवन करने का संकल्प लिया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है। सरकार को अब शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की एक ऐसी समिति बनानी होगी जो छात्रों और शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखकर नए सिरे से यूजीसी के नियमों का मसौदा तैयार करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई भी नियम देश के शैक्षणिक वातावरण और सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने वाला नहीं होना चाहिए। अब पूरे देश की नजरें इस नई समिति की सिफारिशों पर टिकी हैं।
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