Assam Politics
Assam Politics: असम में विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुँच गया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक बार फिर अपने तीखे बयानों से राज्य के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री ने दावा किया है कि राज्य में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) लागू होते ही मतदाता सूची से लाखों ‘मियां’ (बंगाली मूल के मुस्लिम) वोटरों के नाम काट दिए जाएंगे। उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हमने अब तक ऐसे कई ठोस कदम उठाए हैं जिससे मियां समुदाय के लोग वोट न दे सकें। लेकिन यह तो केवल शुरुआत थी। जब पूरे असम में व्यवस्थित रूप से SIR (विशेष गहन संशोधन) की प्रक्रिया पूरी होगी, तब कम से कम 4 से 5 लाख मियां मतदाता सूची से बाहर हो जाएंगे।” मुख्यमंत्री का यह बयान उस समय आया है जब राज्य में एक महीने के भीतर चुनाव होने वाले हैं और बीजेपी लगातार दूसरी बार सत्ता में आने की पुरजोर कोशिश कर रही है।
हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने भाषण में जमीन की खरीद-फरोख्त का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कांग्रेस चाहे उन्हें कितना भी परेशान करे, उनका मुख्य उद्देश्य घुसपैठियों और मियां लोगों की बढ़ती दखलअंदाजी को रोकना है। उन्होंने तिनसुकिया का उदाहरण देते हुए दावा किया, “हाल ही में एक जमीन ट्रांसफर लिस्ट मेरे हाथ लगी है, जिसमें दिख रहा है कि हिंदुओं की प्रॉपर्टी बिक रही है और मियां मुसलमान उसे खरीद रहे हैं। अगर वे तिनसुकिया और दुलियाजान जैसे इलाकों में इसी तरह बसते रहे, तो राज्य की पहचान खतरे में पड़ जाएगी। हमें अभी से इसका ध्यान रखना होगा।”
मुख्यमंत्री के इस बयान पर एआईयूडीएफ (AIUDF) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा, “मैं हाथ जोड़कर कहना चाहता हूँ कि मुख्यमंत्री अपने शब्द वापस लें। मियां किसी से नहीं डरते और अगर आपने उनका अपमान जारी रखा, तो वे चुनाव में आपकी नाव डुबो देंगे।” अजमल ने आगे चेतावनी दी कि सत्ता के लालच में किसी समुदाय को निशाना बनाना हिमंता को भारी पड़ेगा और वे इस बार असम का चुनाव हार जाएंगे।
असम कांग्रेस के प्रवक्ता जेहरुल इस्लाम ने भी मुख्यमंत्री पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि हिमंता बिस्वा सरमा मुख्यमंत्री की कुर्सी बचाने के लिए इतने बेताब हैं कि वे अब समुदायों के साथ-साथ गरीबों का भी अपमान कर रहे हैं। कांग्रेस ने हाल ही में मुख्यमंत्री द्वारा एक रिक्शा चालक के साथ किए गए व्यवहार का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने केवल एक समुदाय की नहीं, बल्कि उन सभी जरूरतमंदों की बेइज्जती की है जो मेहनत-मजदूरी कर अपना गुजारा करते हैं।
विवाद यहीं नहीं थमा, विपक्ष के एक विधायक ने तो यहाँ तक दावा कर दिया कि अगले 15 सालों में मियां समुदाय न केवल असम बल्कि पूरी दुनिया पर राज करेगा। इस बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। कुल मिलाकर, असम में चुनाव से पहले ‘मियां’ वोटरों और ‘SIR’ की प्रक्रिया पर शुरू हुआ यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मतदाता सूची के इस संशोधन को लेकर अब कानूनी और सामाजिक दोनों मोर्चों पर संघर्ष के आसार दिख रहे हैं।
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