Parliament chaos India : संसद के मानसून सत्र के तीसरे दिन यानी बुधवार को बिहार में मतदाता सूचियों की जांच (वोटर वेरिफिकेशन) के मुद्दे पर लोकसभा में जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी दलों के सांसदों ने इस मुद्दे पर नारेबाजी करते हुए सदन के वेल में प्रवेश किया और काले कपड़े लहराकर विरोध जताया। उनके इस प्रदर्शन को देखते हुए सदन का माहौल गर्मा गया।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा, “आप संसद में सड़क जैसा व्यवहार न करें। देश की जनता आपको देख रही है।” उन्होंने सांसदों को याद दिलाया कि सदन की गरिमा को बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन जब हंगामा नहीं थमा तो कार्यवाही को 10 मिनट के भीतर दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया गया।
सिर्फ सदन के भीतर ही नहीं, संसद भवन के बाहर भी विपक्षी दलों ने विरोध प्रदर्शन किया। बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर चल रहे विवाद को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी समेत कई दलों ने संसद के मकर द्वार पर प्रदर्शन किया।
इस प्रदर्शन में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, उनकी बहन प्रियंका गांधी, और सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी शामिल हुए। तीनों नेताओं ने काली पट्टियां बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया।
इधर राज्यसभा में भी यह मामला उठा। आप सांसद संजय सिंह ने SIR प्रक्रिया के ‘संवैधानिक और चुनावी निहितार्थों’ पर चर्चा की मांग करते हुए नोटिस दिया। बताया जा रहा है कि इस पर बुधवार को ही राज्यसभा में चर्चा हो सकती है, जिससे कि सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
बुधवार सुबह 11 बजे जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने फिर से बिहार वोटर वेरिफिकेशन मुद्दे पर हंगामा शुरू कर दिया। सदन में शोरगुल इतना अधिक था कि स्पीकर ओम बिरला को कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक साजिश बता रहा है।
हंगामे के बीच ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध टालने में मदद की है। राहुल गांधी ने संदेह भरे लहजे में कहा, “वह (ट्रंप) ऐसा बार-बार क्यों कह रहे हैं? अब तक उन्होंने 25वीं बार ये दावा किया है।” राहुल गांधी के इस बयान से साफ है कि विपक्ष अमेरिका और भारत के रणनीतिक संबंधों पर भी सरकार से स्पष्टीकरण चाहता है।
विपक्षी दलों की रणनीति साफ नजर आ रही है। वे बिहार में चल रहे वोटर वेरिफिकेशन और SIR प्रक्रिया को राष्ट्रीय मुद्दा बनाकर पेश कर रहे हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से मतदाता सूची में हेराफेरी की जा रही है, और यह लोकतंत्र की बुनियादी संरचना पर हमला है। विपक्ष का यह भी कहना है कि बिहार सरकार और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं, और इस पर संसद में चर्चा होना जरूरी है।
जहां विपक्ष इस मुद्दे को जनता से जुड़ा बताते हुए सरकार को घेरने में जुटा है, वहीं सत्तापक्ष इसे बेवजह का राजनीतिक ड्रामा करार दे रहा है। भाजपा सांसदों का कहना है कि वोटर वेरिफिकेशन एक नियमित और संवैधानिक प्रक्रिया है, और इसे लेकर जनता को गुमराह करना ठीक नहीं।
बिहार वोटर वेरिफिकेशन को लेकर संसद के भीतर और बाहर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है। यह मुद्दा सिर्फ बिहार की राजनीति तक सीमित न रहकर अब संसद के केंद्रीय एजेंडे का हिस्सा बन चुका है। लोकतंत्र में सवाल उठाना जरूरी है, लेकिन सदन की गरिमा बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट जवाब देती है या विवाद और गहराता है।
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