Parliament Monsoon Session 2026 : संसद का मानसून सत्र समाप्त होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार के कामकाज का ब्यौरा पेश किया। उन्होंने कहा कि सत्र के दौरान कुल 12 विधेयक पारित किए गए। हालांकि, उन्होंने सदन में बहस और चर्चा नहीं होने पर चिंता जताई। रिजिजू ने संसद में लगातार हुए हंगामे और गतिरोध के लिए विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष ने चर्चा से दूरी बनाए रखी।

लोकसभा की कम उत्पादकता पर जताई चिंता
किरेन रिजिजू ने कहा कि मानसून सत्र कामकाज की दृष्टि से सफल रहा, लेकिन बहस और चर्चा के लिहाज से इसे संतोषजनक नहीं कहा जा सकता। उनके मुताबिक, लोकसभा में निर्धारित कुल समय के मुकाबले केवल 19 प्रतिशत कामकाज हो पाया। वहीं, राज्यसभा की उत्पादकता को लेकर उन्होंने अलग आंकड़ा बताया। मंत्री ने कहा कि बार-बार हुए हंगामे और विपक्ष के वॉकआउट के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई।

11 विधेयक बिना चर्चा के लोकसभा में हुए पारित
केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि लोकसभा में कुल 12 में से 11 विधेयक बिना विस्तृत चर्चा के पारित हुए, जबकि केवल एक विधेयक पर सदन में पर्याप्त चर्चा हो सकी। उन्होंने विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में कानून बनाने की प्रक्रिया के दौरान स्वस्थ बहस और विचार-विमर्श बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, सदन में हंगामे के बीच भी सांसदों को अपने मुद्दे उठाने चाहिए।
विपक्ष पर चर्चा से भागने का लगाया आरोप
रिजिजू ने कहा कि पहले विपक्षी दल संवाद और चर्चा की प्रक्रिया में हिस्सा लेते थे, लेकिन अब विपक्ष की भूमिका निभा रहे दल चर्चा से बचते नजर आते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट किया, जबकि अन्य दलों के सांसदों ने चर्चा में भाग लिया। मंत्री ने विपक्ष से अपील की कि यदि किसी मुद्दे को लेकर विरोध है तो हंगामे के साथ-साथ सदन में उस पर बहस भी होनी चाहिए।
पेपर लीक विधेयक पर हुई पूरी चर्चा
संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि लोकसभा में जिस एक विधेयक पर पूरी चर्चा हुई, वह पेपर लीक और परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से संबंधित था। ‘सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम’ इसी सत्र में पारित किया गया। उन्होंने कहा कि इस कानून पर लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में चर्चा हुई। परीक्षा व्यवस्था में नकल और पेपर लीक जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से यह कानून महत्वपूर्ण माना गया।

राज्यसभा में भी चर्चा को लेकर दिया बयान
रिजिजू ने कहा कि राज्यसभा में विधेयकों पर अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से चर्चा हुई। उन्होंने दावा किया कि एनडीए के अधिकांश सांसदों के साथ कुछ विपक्षी सांसदों ने भी सदन की बहस में हिस्सा लिया। हालांकि, हंगामे और वॉकआउट के कारण राज्यसभा की कार्यवाही भी कई बार बाधित हुई। मंत्री ने संसद में सार्थक चर्चा को लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा के लिए आवश्यक बताया।
वंदे मातरम् के बाद स्थगित हुई लोकसभा
मानसून सत्र के आखिरी दिन लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। लोकसभा अध्यक्ष के आसन ग्रहण करने के बाद सदस्यों से राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान में खड़े होने का अनुरोध किया गया। सामान्य तौर पर सत्र के समापन पर राष्ट्रगीत से पहले सदन की उपलब्धियों और कार्य उत्पादकता का उल्लेख किया जाता है। हालांकि, इस बार वंदे मातरम् के गायन के बाद लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
आखिरी दिन सदन में मौजूद रहे प्रमुख नेता
सत्र के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रमुख नेता और सांसद सदन में मौजूद थे। कार्यवाही स्थगित होने के साथ ही संसद का यह मानसून सत्र औपचारिक रूप से समाप्त हो गया। पूरे सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी राजनीतिक बयानबाजी भी देखने को मिली।
20 जुलाई को शुरू हुआ था मानसून सत्र
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ था। शुरुआत से ही कई मुद्दों को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनी रही। विपक्षी सांसद अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावे की चोरी के मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहे थे। इसके अलावा दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से बयान देने की मांग भी विपक्ष की प्रमुख मांगों में शामिल रही।
हंगामे के कारण दोनों सदनों में रहा गतिरोध
विपक्ष की मांगों और लगातार विरोध-प्रदर्शन के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। सरकार ने जहां सत्र में 12 विधेयक पारित होने को उपलब्धि बताया, वहीं विपक्ष ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं होने का आरोप लगाया। अब सत्र खत्म होने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने नजरिए से इसकी समीक्षा कर रहे हैं।
Read More : Who is Mohsen Rezaei: मोहसिन रेजाई कौन हैं? ईरान की सुरक्षा कमान में वापसी क्यों अहम











