Parliament Protest: संसद के मानसून सत्र में नीट पेपर लीक और छात्रों के आंदोलन को लेकर राजनीतिक घमासान लगातार बढ़ता जा रहा है। संसद भवन के अंदर और बाहर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। दोनों ही पक्ष सदन में चर्चा कराने की बात कह रहे हैं, लेकिन चर्चा के नियम, समय और प्रक्रिया को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है। इसी वजह से संसद में गतिरोध की स्थिति बनी हुई है।

चर्चा के लिए सरकार तैयार, लेकिन नियमों पर अटका मामला
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा और राज्यसभा में स्पष्ट किया था कि सरकार नीट पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि चर्चा किस नियम के तहत होगी और कितने समय तक चलेगी, इसका फैसला बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में सभी दलों के नेताओं से बातचीत के बाद किया जाएगा। हालांकि, अभी तक सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई है।

एनडीए ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
संसद परिसर में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच एनडीए नेताओं ने भी विपक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सत्ता पक्ष का आरोप है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन कर सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी। एनडीए नेताओं का कहना है कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसे प्रदर्शनों से बचना चाहिए और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए।
प्रियंका गांधी ने छात्रों की मांगों को बताया जायज
वहीं, कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने छात्रों के समर्थन में सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब नेतृत्व को आगे आकर छात्रों की बात सुननी चाहिए। प्रियंका गांधी ने कहा कि छात्र अपनी मांगों को लेकर स्पष्ट हैं और उनकी आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।उन्होंने कहा कि छात्रों की पहली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। दूसरी मांग प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की है। इसके अलावा छात्रों की अन्य मांगों पर भी सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
छात्रों का सिस्टम से भरोसा टूटा: प्रियंका गांधी
प्रियंका गांधी ने कहा कि आज सबसे बड़ी समस्या यह है कि छात्रों का भरोसा व्यवस्था से कमजोर हो गया है। उन्होंने कहा कि जब छात्रों को उसी व्यवस्था से समाधान देने की बात कही जाती है जिस पर वे सवाल उठा रहे हैं, तो उनके मन में विश्वास पैदा नहीं होता।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हर माता-पिता इस बात को समझते हैं कि जब बच्चों का भरोसा टूट जाता है, तो सबसे पहले उनकी बात सुनना जरूरी होता है। सरकार और नेताओं को भी छात्रों की भावनाओं को समझना चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान निकालने की कोशिश करनी चाहिए।
हजारों छात्र सड़कों पर, समाधान की जरूरत
प्रियंका गांधी ने कहा कि देशभर में हजारों छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर इंडिया गेट और कई अन्य स्थानों पर युवा अपनी आवाज उठा रहे हैं। ऐसे समय में सरकार को टकराव की जगह संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान सामूहिक और रचनात्मक तरीके से ही संभव है। छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि घायल छात्रों की पीड़ा को समझना और उनकी शिकायतों पर कार्रवाई करना जरूरी है।
NEET विवाद पर आगे की रणनीति पर नजर
फिलहाल संसद में सरकार और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी मांगों पर कायम हैं। विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और छात्रों पर हुई कार्रवाई की जांच की मांग कर रहा है, जबकि सरकार नियमों के तहत चर्चा कराने की बात कह रही है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि संसद में जारी गतिरोध कब खत्म होगा और नीट मामले पर किस तरह की चर्चा होती है।
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