Passport Valid Document : वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए पासपोर्ट रहेगा वैध, चुनाव आयोग ने दूर किया भ्रम

Passport Valid Document : देश भर में मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) का कार्य जारी है। इस बीच, मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के इच्छुक नागरिकों के मन में भारतीय पासपोर्ट की वैधता को लेकर उत्पन्न हुआ भ्रम अब समाप्त हो गया है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने के लिए भारतीय पासपोर्ट एक पूर्णतः वैध और मान्य दस्तावेज बना रहेगा। यह स्पष्टीकरण तब आया है जब हाल ही में विदेश मंत्रालय द्वारा पासपोर्ट की नागरिकता संबंधी स्थिति पर दिए गए बयान के बाद जनता के बीच संशय की स्थिति बन गई थी। चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक संदेश में कहा है कि नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

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पासपोर्ट बनाम नागरिकता: आखिर क्यों बनी संशय की स्थिति?

लोगों में भ्रम की स्थिति तब पैदा हुई जब विदेश मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रूप से एक ‘यात्रा दस्तावेज’ है और इसे नागरिकता का अंतिम या निर्णायक प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। सरकार ने अपने तर्क के समर्थन में पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 और बॉम्बे हाई कोर्ट के वर्ष 2013 के एक फैसले का उल्लेख किया। इस कानूनी व्याख्या के अनुसार, विशेष परिस्थितियों में जनहित को ध्यान में रखते हुए कभी-कभी गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी करने का प्रावधान है। इसी तकनीकी कानूनी पहलू के कारण यह चर्चा शुरू हुई कि क्या पासपोर्ट केवल एक पहचान पत्र है या नागरिकता का पक्का सबूत।

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चुनाव आयोग का स्पष्ट आश्वासन और प्रक्रिया

चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करते हुए नागरिकों को आश्वस्त किया है। अधिकारियों के मुताबिक, मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या पात्रता सिद्ध करने के लिए जो 12 स्वीकृत दस्तावेज निर्धारित किए गए हैं, उनमें पासपोर्ट पूर्व की भांति शामिल है। बिहार और असम सहित अन्य राज्यों में चले पिछले सुधार अभियानों की तर्ज पर ही इस बार भी पासपोर्ट को पूरी तरह स्वीकार्य रखा गया है। इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) आवेदक की पात्रता की जांच के लिए इन 12 मान्य दस्तावेजों का उपयोग करते हैं, जिनमें पासपोर्ट अपनी मजबूती बनाए हुए है।

पहचान और पात्रता का सशक्त माध्यम

चुनाव आयोग ने दोहराया है कि पासपोर्ट केवल यात्रा का जरिया नहीं है, बल्कि यह एक सशक्त ‘फोटो-आईडी’ और पहचान साबित करने वाला मजबूत माध्यम है। वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया में इसे एक विश्वसनीय दस्तावेज माना जाता है। चुनाव आयोग के इस ताजा रुख से उन आवेदकों को बड़ी राहत मिली है जो अपने दस्तावेजों के चयन को लेकर दुविधा में थे। आयोग की ओर से साफ कहा गया है कि किसी भी नागरिक को इस संबंध में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है; वे बिना किसी झिझक के अपने पासपोर्ट का उपयोग मतदाता पंजीकरण के लिए कर सकते हैं।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता

चुनाव आयोग का यह कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। किसी भी चुनाव में प्रत्येक योग्य नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित करना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। दस्तावेजों को लेकर उपजे इस छोटे से तकनीकी विवाद को समय रहते सुलझाकर आयोग ने यह संदेश दिया है कि नागरिक पंजीकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी। अब नागरिक पूरे विश्वास के साथ अपना आवेदन जमा कर सकते हैं और लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर सकते हैं।

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Chandan Das

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