Patiala House Court : पटियाला हाउस कोर्ट ने संसद मार्ग थाने में दर्ज FIR नंबर 108/2026 के मामले में गिरफ्तार किए गए 17 लोगों को जमानत दे दी है। इंडियन यूथ कांग्रेस के मुताबिक, इन लोगों में स्वतंत्र पत्रकार और छात्र भी शामिल हैं। संगठन का दावा है कि ये लोग कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल थे और कुछ लोग प्रदर्शन की कवरेज कर रहे थे।
संयुक्त कानूनी प्रकोष्ठ ने आरोपियों की ओर से की पैरवी
आरोपियों की ओर से इंडियन यूथ कांग्रेस, इंडियन नेशनल कांग्रेस और अन्य संगठनों द्वारा गठित संयुक्त कानूनी प्रकोष्ठ ने अदालत में पैरवी की। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अधिवक्ता सैमन फारूकी, अभिष्ट हेला, ऋषभ रंजन, सबा खान और चितवन गोदारा समेत कई वकीलों ने आरोपियों का पक्ष अदालत के सामने रखा और उनकी गिरफ्तारी तथा हिरासत की मांग का विरोध किया।
पुलिस ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत मांगी
सुनवाई के दौरान पुलिस ने सभी 17 आरोपियों के लिए 14 दिन की न्यायिक हिरासत की मांग की थी। आरोपियों की ओर से इस मांग का विरोध करते हुए अधिवक्ता सैमन फारूकी ने दलील दी कि जिन अपराधों के तहत आरोप लगाए गए हैं, उनमें अधिकतम सजा सात साल से कम है। ऐसे में उनका कहना था कि आरोपियों की गिरफ्तारी और लगातार हिरासत आवश्यक नहीं थी।
गिरफ्तारी में व्यक्तिगत भूमिका स्पष्ट नहीं होने का दावा
बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष यह भी तर्क रखा कि गिरफ्तारी के आधार में किसी भी आरोपी की कथित व्यक्तिगत भूमिका स्पष्ट रूप से नहीं बताई गई है। वकीलों के मुताबिक, प्रदर्शन में करीब 50 लोग मौजूद थे, लेकिन उनमें से केवल 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि कथित घटना से संबंधित कोई CCTV फुटेज रिकॉर्ड पर पेश नहीं किया गया।
लोकतांत्रिक अधिकार के तहत प्रदर्शन का दावा
संयुक्त कानूनी प्रकोष्ठ ने अदालत में कहा कि आरोपी युवा हैं और लोकतांत्रिक अधिकार के तहत अपनी असहमति तथा विरोध दर्ज करा रहे थे। बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि कुछ आरोपियों को प्रदर्शन के दौरान चोटें आई थीं। आरोप लगाया गया कि घटना के तुरंत बाद उनका मेडिकल परीक्षण नहीं कराया गया और उन्हें तत्काल अस्पताल भी नहीं ले जाया गया।
रिहाई से हिंसा की आशंका नहीं होने की दलील
आरोपियों के वकीलों ने यह तर्क भी दिया कि उनकी रिहाई के बाद हिंसा करने की कोई वास्तविक आशंका नहीं है। बचाव पक्ष के अनुसार, युवाओं को लंबे समय तक हिरासत में रखने से उनकी पढ़ाई और पेशेवर भविष्य प्रभावित हो सकता है। इन दलीलों के आधार पर अदालत से आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने के बजाय जमानत देने का आग्रह किया गया।
15 हजार रुपये के जमानती बांड पर मिली राहत
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सभी 17 आरोपियों को 15 हजार रुपये के जमानती बांड पर जमानत दे दी। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, चार महिला आरोपियों को व्यक्तिगत मुचलका भरने के बाद तत्काल रिहा कर दिया गया। वहीं, बाकी 13 आरोपियों को भी जमानत प्रदान की गई है।
13 आरोपियों की रिहाई छह अक्टूबर को होगी
प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि बाकी 13 आरोपी आवश्यक जमानत बांड और एक-एक जमानतदार प्रस्तुत करने के बाद छह अक्टूबर को रिहा होंगे। इस तरह अदालत के आदेश के बाद सभी 17 आरोपियों को हिरासत से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।
हिरासत में मारपीट के आरोपों पर अदालत सख्त
मामले में दो आरोपियों ने पुलिस थाने में हिरासत के दौरान उनके साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया है। इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने डीसीपी, नई दिल्ली से रिपोर्ट तलब की है। साथ ही घायल बताए जा रहे आरोपियों को आवश्यक चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
संसद मार्ग थाने के CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश
अदालत ने थाना संसद मार्ग में लगे CCTV कैमरों की फुटेज को सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया है। यह फुटेज हिरासत के दौरान लगाए गए आरोपों और मामले की परिस्थितियों की जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल अदालत के जमानत आदेश और CCTV सुरक्षित रखने के निर्देश के बाद मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
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