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Pawan Jallad: निर्भया को इंसाफ दिलाने वाले जल्लाद पवन की बदहाली! CM योगी से क्यों लगाई गुहार?

Pawan Jallad: दिल्ली के निर्भया गैंगरेप केस के दोषियों को फांसी देने वाले जल्लाद पवन एक बार फिर सुर्खियों में हैं। निर्भया के दोषियों को फांसी पर चढ़ाने के करीब 5 साल बाद, देश में अब तक किसी को फांसी नहीं दी गई है। इस बीच, पवन जल्लाद ने आर्थिक तंगी की वजह से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मानदेय बढ़ाने की गुहार लगाई है।

“10 हजार रुपये में मुश्किल से गुजर-बसर”

मेरठ जेल से जुड़े पवन जल्लाद ने जिला कारागार के जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि उन्हें सरकार की ओर से हर महीने 10,000 रुपये का मानदेय मिलता है, जो उनके परिवार के खर्च के लिए पर्याप्त नहीं है।पवन का कहना है, “मैं रोज़ मेरठ जेल में हाजिरी लगाता हूं, लेकिन 10 हजार रुपये में अब गुजारा मुश्किल हो गया है। सरकार से मेरी अपील है कि इस रकम को बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह किया जाए, ताकि मेरा परिवार सम्मानपूर्वक जीवन जी सके।”

पत्र पहुंचा जेल प्रशासन तक

जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने पुष्टि की है कि पवन जल्लाद का पत्र उन्हें प्राप्त हुआ है और इसे उच्च अधिकारियों को अग्रेषित कर दिया गया है। जेल प्रशासन का कहना है कि पवन की मांग पर विचार किया जा सकता है, क्योंकि वे देश में बचे कुछ गिने-चुने पेशेवर जल्लादों में से एक हैं।

निर्भया केस के चारों दोषियों को दी थी फांसी

पवन जल्लाद वही हैं जिन्होंने 20 मार्च 2020 को दिल्ली की तिहाड़ जेल में निर्भया के चारों दोषियों — मुकेश, अक्षय, विनय और पवन गुप्ता — को फांसी पर चढ़ाया था। यह मामला पूरे देश को झकझोर देने वाला था, और इन दोषियों की फांसी को “न्याय की जीत” के रूप में देखा गया था।पवन बताते हैं कि निर्भया केस के बाद उन्होंने चार फांसियां दीं, लेकिन इसके बाद से देश में किसी भी दोषी को फांसी पर नहीं चढ़ाया गया। हालांकि अदालतें सजा-ए-मौत सुनाती रही हैं, लेकिन उनके क्रियान्वयन के अवसर नहीं आए हैं।

आर्थिक संकट में जी रहे हैं पवन जल्लाद

पवन का कहना है कि भले ही पिछले पांच वर्षों में किसी को फांसी नहीं दी गई हो, लेकिन वे अपनी ड्यूटी के प्रति समर्पित हैं और रोज़ मेरठ जेल में उपस्थित रहते हैं।उन्होंने कहा, “देश के लिए सेवा करते हुए मैं गर्व महसूस करता हूं, लेकिन अब स्थिति ऐसी है कि रोजमर्रा का खर्च चलाना कठिन हो गया है। सरकार अगर हमारा मानदेय बढ़ा दे, तो यह हम जैसे जल्लादों के जीवन को थोड़ी राहत देगा।”

देश में बचे हैं गिने-चुने जल्लाद

भारत में अब जल्लादों की संख्या बेहद कम रह गई है। दिल्ली, मेरठ और पुणे जैसे कुछ ही शहरों में प्रशिक्षित जल्लाद मौजूद हैं। पवन जल्लाद मेरठ के रहने वाले हैं और उनके परिवार ने तीन पीढ़ियों तक फांसी देने का काम किया है।पवन जल्लाद का मानदेय बढ़ाने की मांग एक बार फिर सरकार के सामने जल्लादों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को उजागर करती है। निर्भया जैसे मामलों में न्याय का प्रतीक माने जाने वाले पवन अब अपनी आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब देखना होगा कि योगी सरकार उनकी इस मांग पर क्या फैसला लेती है।

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