Jaishankar US comment: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक में एक कड़ा और स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोहरे मापदंड (Double Standards) अपनाने की नीति अब स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने भले ही किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान का इशारा सीधे तौर पर अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया नीतियों की ओर माना जा रहा है।
जयशंकर ने कहा कि “शांति और विकास तभी संभव है जब वैश्विक समुदाय समान दृष्टिकोण अपनाए। कुछ देशों द्वारा टैरिफ, प्रतिबंध और संघर्षों पर अलग-अलग मानदंड अपनाना वैश्विक असंतुलन को बढ़ावा देता है।”
अमेरिका पर निशाना, ट्रंप की नीतियों पर सवाल
जयशंकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने फार्मा, फर्नीचर और टेक्नोलॉजी सेक्टर पर उच्च टैरिफ लगाकर भारत समेत कई देशों पर आर्थिक दबाव बनाया है। साथ ही, ट्रंप प्रशासन ने गाजा संघर्ष, रूस-यूक्रेन युद्ध और चीन को लेकर जिस तरह का विरोधाभासी रुख अपनाया है, उस पर भारत समेत कई विकासशील देश सवाल उठा रहे हैं।
जयशंकर ने स्पष्ट कहा, “दुनिया को यह समझना होगा कि वैश्विक शांति और समृद्धि के लिए नीति में पारदर्शिता और निष्पक्षता जरूरी है। यदि टैरिफ या प्रतिबंध किसी एक के लिए सख्त और दूसरे के लिए नरम हों, तो यह असंतुलन पैदा करता है, जो विकासशील देशों के लिए नुकसानदायक है।”
शांति, कूटनीति और संवाद की पैरवी
विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि अब समय है कि सभी देश कूटनीति और संवाद के रास्ते पर लौटें। “विकासशील देशों की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। वैश्विक व्यवस्था तभी न्यायसंगत हो सकती है जब हर देश को समान महत्व मिले,” जयशंकर ने कहा।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत एक ऐसे वैश्विक तंत्र का समर्थन करता है जहां कोई भी देश “एकतरफा निर्णय” लेकर दूसरों पर प्रभाव न डाले।
गाजा और यूक्रेन संकट पर भी बोले जयशंकर
जयशंकर ने गाजा में जारी संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध का भी उल्लेख किया और कहा कि इन संकटों में भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया में पक्षपात देखा गया है। उन्होंने कहा कि “मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून को सभी पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए, वरना इनकी साख पर सवाल उठेंगे।”
एस. जयशंकर का यह कड़ा बयान भारत के बदलते वैश्विक रुख को दर्शाता है, जहां देश अब सिर्फ प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नीतियों पर सक्रियता से सवाल उठा रहा है। अमेरिका और ट्रंप प्रशासन के आर्थिक और भू-राजनीतिक फैसलों की समीक्षा की जा रही है, और भारत जैसे उभरते देशों की ओर से यह साफ संदेश जा रहा है कि अब ‘डबल स्टैंडर्ड’ नहीं चलेंगे।
Read More : Trump TikTok deal: डोनाल्ड ट्रंप ने TikTok डील पर किया हस्ताक्षर, अब ऐप पूरी तरह अमेरिका के नियंत्रण में
Jaishankar US comment: ‘डबल स्टैंडर्ड से शांति और विकास संभव नहीं’, विदेश मंत्री जयशंकर का अमेरिका और ट्रंप पर परोक्ष हमला
Jaishankar US comment: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक में एक कड़ा और स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोहरे मापदंड (Double Standards) अपनाने की नीति अब स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने भले ही किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान का इशारा सीधे तौर पर अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया नीतियों की ओर माना जा रहा है।
जयशंकर ने कहा कि “शांति और विकास तभी संभव है जब वैश्विक समुदाय समान दृष्टिकोण अपनाए। कुछ देशों द्वारा टैरिफ, प्रतिबंध और संघर्षों पर अलग-अलग मानदंड अपनाना वैश्विक असंतुलन को बढ़ावा देता है।”
अमेरिका पर निशाना, ट्रंप की नीतियों पर सवाल
जयशंकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने फार्मा, फर्नीचर और टेक्नोलॉजी सेक्टर पर उच्च टैरिफ लगाकर भारत समेत कई देशों पर आर्थिक दबाव बनाया है। साथ ही, ट्रंप प्रशासन ने गाजा संघर्ष, रूस-यूक्रेन युद्ध और चीन को लेकर जिस तरह का विरोधाभासी रुख अपनाया है, उस पर भारत समेत कई विकासशील देश सवाल उठा रहे हैं।
जयशंकर ने स्पष्ट कहा, “दुनिया को यह समझना होगा कि वैश्विक शांति और समृद्धि के लिए नीति में पारदर्शिता और निष्पक्षता जरूरी है। यदि टैरिफ या प्रतिबंध किसी एक के लिए सख्त और दूसरे के लिए नरम हों, तो यह असंतुलन पैदा करता है, जो विकासशील देशों के लिए नुकसानदायक है।”
शांति, कूटनीति और संवाद की पैरवी
विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि अब समय है कि सभी देश कूटनीति और संवाद के रास्ते पर लौटें। “विकासशील देशों की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। वैश्विक व्यवस्था तभी न्यायसंगत हो सकती है जब हर देश को समान महत्व मिले,” जयशंकर ने कहा।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत एक ऐसे वैश्विक तंत्र का समर्थन करता है जहां कोई भी देश “एकतरफा निर्णय” लेकर दूसरों पर प्रभाव न डाले।
गाजा और यूक्रेन संकट पर भी बोले जयशंकर
जयशंकर ने गाजा में जारी संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध का भी उल्लेख किया और कहा कि इन संकटों में भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया में पक्षपात देखा गया है। उन्होंने कहा कि “मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून को सभी पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए, वरना इनकी साख पर सवाल उठेंगे।”
एस. जयशंकर का यह कड़ा बयान भारत के बदलते वैश्विक रुख को दर्शाता है, जहां देश अब सिर्फ प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नीतियों पर सक्रियता से सवाल उठा रहा है। अमेरिका और ट्रंप प्रशासन के आर्थिक और भू-राजनीतिक फैसलों की समीक्षा की जा रही है, और भारत जैसे उभरते देशों की ओर से यह साफ संदेश जा रहा है कि अब ‘डबल स्टैंडर्ड’ नहीं चलेंगे।
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