Priyanka Gandhi: दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर तेज हो गई है। आंदोलन के दौरान एक समाचार चैनल के पत्रकार पर कथित हमले और छात्रों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने के आरोपों ने संसद से लेकर सड़कों तक बहस छेड़ दी है। मानसून सत्र के बीच कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की आवाज को सुना जाना चाहिए और किसी भी प्रकार की हिंसा उचित नहीं मानी जा सकती।

प्रियंका गांधी ने हिंसा पर रखा स्पष्ट पक्ष
संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि कांग्रेस किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करती। उन्होंने दोहराया कि महात्मा गांधी ने देश को अहिंसा के मार्ग पर चलकर आजादी दिलाई थी और यही लोकतंत्र की मूल भावना भी है। उन्होंने कहा कि किसी भी पक्ष द्वारा हिंसा स्वीकार्य नहीं हो सकती, लेकिन इसके साथ ही सरकार को उन परिस्थितियों की भी निष्पक्ष जानकारी देश के सामने रखनी चाहिए, जिनमें छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि अपने अधिकारों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे छात्रों के साथ सख्त कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि यदि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, तो उनके साथ लाठीचार्ज और आंसू गैस जैसी कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि वह केवल राजनीतिक घटनाओं पर ही नहीं, बल्कि छात्रों से जुड़े मुद्दों और उनके संघर्ष को भी प्रमुखता से सामने लाए।
शिक्षा बजट और कर्ज माफी को लेकर सरकार पर निशाना
कांग्रेस सांसद ने केंद्र सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश का शिक्षा बजट लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये है, जबकि बड़े उद्योगपतियों के लाखों करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए जाने की चर्चा होती रही है। प्रियंका गांधी का कहना था कि यदि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने पर अधिक ध्यान दिया जाए, तो छात्रों में असंतोष की स्थिति कम हो सकती है। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
पेपर लीक के मुद्दे पर जताई चिंता
प्रियंका गांधी ने कहा कि लगातार सामने आ रहे परीक्षा पेपर लीक के मामलों ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। उनके अनुसार, लाखों छात्र कठिन मेहनत से परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन यदि परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठते हैं तो सबसे अधिक नुकसान छात्रों का होता है। उन्होंने कहा कि छात्र न्याय, पारदर्शिता और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, जिसे लोकतांत्रिक अधिकारों के दायरे में देखा जाना चाहिए।
विपक्ष ने संसद में काले कपड़े पहनकर जताया विरोध
छात्रों के समर्थन में विपक्षी दलों ने संसद परिसर में काले कपड़े पहनकर विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस सहित कई विपक्षी सांसदों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कहा कि छात्रों के साथ हुई कथित कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई मांगों का समाधान संवाद के माध्यम से होना चाहिए, न कि कठोर कार्रवाई के जरिए।
पवन खेड़ा ने भी सरकार को घेरा
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि विपक्ष का यह विरोध केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि छात्रों के हितों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि सभी विपक्षी सांसद छात्रों के समर्थन में और सरकार के कथित कठोर रवैये के विरोध में काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे हैं। उनके अनुसार, यह विरोध शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों के अधिकारों की रक्षा की मांग को लेकर किया जा रहा है।
विरोध जारी रखने का विपक्ष का संकेत
विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया है कि जब तक छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता और परीक्षा प्रणाली से जुड़े विवादों पर जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। छात्र आंदोलन, शिक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस फिलहाल थमती नजर नहीं आ रही है। आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर यह मुद्दा और अधिक प्रमुखता से उठने की संभावना है।












