Periyar Library Controversy : तमिलनाडु के कोयंबटूर में विचारक ईवी रामासामी पेरियार के नाम पर स्थापित ‘पेरियार अरिवुलगम’ लाइब्रेरी और साइंस सेंटर विवादों में घिर गया है। यहां किताबों की खरीद को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। दावा किया जा रहा है कि लाइब्रेरी में ऐसे लेखकों और प्रकाशकों की किताबें रखी गई हैं, जिनकी वास्तविक पहचान संदिग्ध है। इतना ही नहीं, कुछ पुस्तकों की सामग्री में तथ्यात्मक गलतियां और व्याकरण संबंधी खामियां होने के साथ उनके AI की मदद से तैयार किए जाने की आशंका भी जताई गई है।
TVK और DMK के बीच शुरू हुई राजनीतिक जंग
किताबों की कथित संदिग्ध खरीद का मामला अब तमिलनाडु की राजनीति में भी तूल पकड़ चुका है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) और प्रमुख विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। दोनों पक्षों की ओर से इस खरीद प्रक्रिया के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इस विवाद ने लाइब्रेरी के संचालन, सरकारी खर्च और खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तमिल लेखक पेरुमल मुरुगन ने किया कथित गड़बड़ी का खुलासा
इस मामले को सार्वजनिक करने वाले प्रसिद्ध तमिल लेखक पेरुमल मुरुगन हैं। उन्होंने ऑनलाइन पत्रिका ‘सिंधई’ में प्रकाशित अपने लेख में दावा किया कि फर्जी प्रकाशकों के माध्यम से हजारों किताबें कथित तौर पर बेहद ऊंची कीमतों पर खरीदी गईं। उनके मुताबिक, इन पुस्तकों में कई गंभीर तथ्यात्मक गलतियां हैं। भाषा और व्याकरण की त्रुटियों के अलावा कुछ सामग्री ऐसी प्रतीत होती है, जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया है।

फर्जी पते वाले प्रकाशकों के नाम भी आए सामने
तमिलनाडु के मंत्री राज मोहन ने शुक्रवार को बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी। वहीं, NDTV को दिए इंटरव्यू में पेरुमल मुरुगन ने ‘अगल विलक्कु’ और ‘फीनिक्स पब्लिकेशन्स’ नामक प्रकाशकों पर सवाल उठाए। उनका दावा है कि इन प्रकाशकों के पते वास्तविक नहीं हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि इन्हें केवल लाइब्रेरी को किताबें सप्लाई करने के उद्देश्य से बनाया गया था।
अगल विलक्कु की 1800 किताबों ने बढ़ाई चिंता
इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा सवाल ‘अगल विलक्कु’ प्रकाशक की लगभग 1,800 पुस्तकों को लेकर उठ रहे हैं। मुरुगन के अनुसार, तमिल साहित्य की दुनिया में करीब चार दशक बिताने के बावजूद उन्होंने इस प्रकाशक का नाम पहले कभी नहीं सुना था। ये किताबें लाइब्रेरी की चौथी मंजिल पर स्थित तमिल संग्रह का बड़ा हिस्सा हैं। इनमें कई हार्डबाउंड पुस्तकें शामिल हैं, जिनकी कीमत 1,400 रुपये या उससे अधिक बताई गई है।

1445 रुपये की किताब में मिली ऐतिहासिक और साहित्यिक गलती
पेरुमल मुरुगन ने ‘नलदियार वाझकईयिन वाझकाट्टी’ नामक पुस्तक का उदाहरण दिया। लगभग 300 पन्नों की इस किताब को ‘सूर्या बालू’ नामक लेखक की रचना बताया गया है और इसकी कीमत 1,445 रुपये रखी गई है। मुरुगन के मुताबिक, इसमें नलदियार को प्रसिद्ध तमिल कवि और दार्शनिक बताया गया है, जबकि वास्तव में नलदियार जैन साधुओं से जुड़े चार पंक्तियों वाले छंदों का संग्रह है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि किताबों की खरीद में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

