Pete Hegseth on Iran War: अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने उन मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि ईरान के साथ तनाव और सैन्य कार्रवाई के कारण अमेरिकी मिसाइलों का भंडार खतरनाक स्तर तक घट गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए हेगसेथ ने CNN की रिपोर्ट की आलोचना की और कहा कि उसकी प्रमुख हेडलाइन तथ्यों पर आधारित नहीं है। उन्होंने लिखा कि रिपोर्ट में सच्चाई नहीं है और ऐसे दावों को प्रकाशित करना गैर-जिम्मेदाराना है। साथ ही उन्होंने मीडिया संस्थान की रिपोर्टिंग पर भी सवाल उठाए।

CNN की रिपोर्ट में क्या किया गया दावा
CNN ने कई सूत्रों के हवाले से दावा किया था कि ईरान के साथ संघर्ष के दौरान अमेरिकी सेना ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने अपने THAAD (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) इंटरसेप्टर मिसाइलों का लगभग 80 प्रतिशत और पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का करीब आधा भंडार उपयोग कर लिया है। रिपोर्ट में कहा गया कि इस कारण अमेरिकी वायु रक्षा क्षमता पर दबाव बढ़ा है।

‘खतरनाक स्तर’ तक घटने का किया गया दावा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अमेरिकी सेना के वरिष्ठ कमांडरों ने पेंटागन को चेतावनी दी है कि हथियारों का भंडार अब “खतरनाक रूप से कम” स्तर पर पहुंच चुका है। CNN के अनुसार, लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणालियों में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे भविष्य की संभावित सैन्य चुनौतियों के दौरान अमेरिका की तैयारियों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
CSIS के अनुमान का भी किया गया उल्लेख
रिपोर्ट में सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के अनुमान का भी हवाला दिया गया। इसके मुताबिक, ईरान के साथ संघर्ष शुरू होने से पहले अमेरिका के पास लगभग 452 THAAD मिसाइलें और करीब 2,200 पैट्रियट इंटरसेप्टर मौजूद थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ट्रंप प्रशासन के भीतर ईरान के खिलाफ आगे की सैन्य कार्रवाई पर विचार करते समय इन हथियारों के तेजी से घटते भंडार को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई थी।
खाड़ी देशों की सुरक्षा को लेकर भी जताई गई चिंता
CNN की रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई थी। उनका मानना था कि यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है तो अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम की सीमित उपलब्धता के कारण ईरानी मिसाइलों या ड्रोन हमलों से सुरक्षा सुनिश्चित करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस मुद्दे का असर क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति पर पड़ सकता है।

ट्रंप के फैसले से भी जोड़ा गया दावा
रिपोर्ट में दावा किया गया कि संभावित नागरिक हताहतों, ऊर्जा ढांचे पर खतरे और हथियारों के घटते भंडार से जुड़ी खुफिया जानकारियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्णय को प्रभावित किया। रिपोर्ट के अनुसार, इन्हीं कारणों से उन्होंने सप्ताहांत में ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमलों को रोकने का फैसला लिया। साथ ही यह भी कहा गया कि अमेरिका ने संघर्ष के दौरान अपने अत्यधिक सटीक लंबी दूरी के सतह से हवा में मार करने वाले अधिकांश हथियारों का उपयोग कर लिया था और टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों का भंडार भी पहले की तुलना में काफी कम हो गया है।
पेंटागन और व्हाइट हाउस ने किया स्पष्ट खंडन
इन दावों पर पेंटागन और व्हाइट हाउस दोनों ने आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए रिपोर्ट को खारिज कर दिया। पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पार्नेल ने कहा कि अमेरिकी सेना के पास राष्ट्रपति के निर्देशानुसार किसी भी समय और किसी भी स्थान पर कार्रवाई करने के लिए आवश्यक सभी सैन्य क्षमताएं उपलब्ध हैं। वहीं, व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने कहा कि अमेरिकी सशस्त्र बलों के पास राष्ट्रपति ट्रंप के सभी रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त हथियार, गोला-बारूद और सैन्य संसाधन मौजूद हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अमेरिका की सैन्य तैयारियों को लेकर किसी तरह की कमी नहीं है और देश अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने में पूरी तरह सक्षम है।
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