Pitru Paksha 2025: चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग, श्राद्ध से मिलेगा पितरों का आशीर्वाद! जानें सही विधि और लाभ

Pitru Paksha 2025: पितृ पक्ष 2025 का समय इस बार विशेष आध्यात्मिक महत्व लिए हुए है। 7 सितंबर से 21 सितंबर तक चलने वाले इस पावन काल में इस बार एक विशेष खगोलीय घटना—पूर्ण चंद्र ग्रहण—का संयोग भी जुड़ रहा है। यह ग्रहण भारत समेत एशिया, यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देगा, जिससे इसका धार्मिक प्रभाव और भी अधिक माना जा रहा है।

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पितृ पक्ष का महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में हमारे पूर्वज पितृलोक से पृथ्वी पर आते हैं और अपने परिजनों से तर्पण, अर्पण और श्रद्धा की अपेक्षा रखते हैं। इस दौरान विधिवत श्राद्ध करने से पूर्वजों की आत्मा तृप्त होती है और उनका आशीर्वाद सुख-शांति, समृद्धि और संतान की प्रगति के रूप में प्राप्त होता है।

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श्राद्ध की विधि और तर्पण का समय

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, पितरों के लिए दोपहर का समय—12 बजे से 1 बजे के बीच—श्राद्ध व तर्पण के लिए श्रेष्ठ होता है। इस समय किया गया कर्म सीधा पितरों तक पहुंचता है। तिल, कुशा और पवित्र जल से तर्पण करना चाहिए। साथ ही, ब्राह्मणों को भोजन कराना, दान देना और जरुरतमंदों की सहायता करना पुण्यदायक माना जाता है।

पितृ दोष और उसका प्रभाव

जिन घरों में पितरों का सम्मान नहीं किया जाता या पितृ पक्ष में उनका स्मरण नहीं होता, वहां पितृ दोष उत्पन्न हो सकता है। इसका असर कुंडली पर पड़ता है और व्यक्ति के जीवन में रुकावटें, आर्थिक परेशानियां, वैवाहिक तनाव और अस्वस्थता देखने को मिलती है।

क्या करें और क्या न करें

करें:

दोपहर में विधिवत तर्पण करें।

जरूरतमंदों की सेवा करें।

शांत और सात्विक वातावरण बनाए रखें।

न करें:

मांस, मदिरा या किसी भी प्रकार के नशे का सेवन।

घर में कलह या किसी का अपमान।

जीवों को बिना कारण हानि।

पितृ पक्ष 2025 की श्राद्ध तिथियां

7 सितंबर: पूर्णिमा श्राद्ध

8 से 21 सितंबर: प्रतिपदा से अमावस्या तक सभी तिथियों के श्राद्ध

22 सितंबर: मातामह श्राद्ध (नाना-नानी के लिए)

लाभ: क्यों है ये समय खास?

पितृ पक्ष में श्रद्धा से किए गए कर्मों का फल कई गुना मिलता है। परिवार में समृद्धि आती है, संतान की उन्नति होती है, और रोग-संकट दूर होते हैं। इस बार चंद्र ग्रहण के संयोग के कारण यह समय अत्यंत शक्तिशाली और फलदायी माना जा रहा है।

निष्कर्ष: पितृ पक्ष केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अपने मूल से जुड़ने का अवसर है। इस पावन काल में अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद कर तर्पण करें और उनके आशीर्वाद से जीवन को सार्थक बनाएं।

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