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Plane Crash Fuel Issue :12 जून की दुर्घटना का केंद्र बना ईंधन स्विच, FAA ने 2018 में ही जताई थी चिंता

Plane Crash Fuel Issue  : 12 जून को अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हुए एयर इंडिया के विमान AI171 की जांच में सामने आया है कि इस हादसे का कारण विमान का ईंधन नियंत्रण स्विच था, जिसमें पहले से ही एक तकनीकी खामी की आशंका जताई जा चुकी थी। अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन (FAA) ने सात साल पहले ही इस तरह की संभावित खामी को लेकर एडवाइजरी जारी की थी, लेकिन एयर इंडिया ने उस चेतावनी पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि उस सलाह पर समय रहते कार्रवाई की गई होती, तो इस भयावह त्रासदी को टाला जा सकता था।

AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट

शनिवार को विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो (AAIB) ने हादसे की प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में बताया गया कि जैसे ही विमान ने उड़ान भरी, कुछ ही सेकंड के भीतर दोनों इंजन बंद हो गए। इसके पीछे वजह यह बताई गई कि ईंधन स्विच ‘रन’ से ‘कटऑफ़’ की स्थिति में चला गया, जिससे ईंधन की आपूर्ति बंद हो गई। पायलटों ने स्थिति को संभालने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

FAA ने 2018 में दी थी चेतावनी

दिसंबर 2018 में FAA ने बोइंग 737 विमानों में संभावित ईंधन स्विच की खामी को लेकर ‘स्पेशल एयरवर्थीनेस इंफॉर्मेशन बुलेटिन’ (SAIB) जारी किया था। इस एडवाइजरी में बताया गया था कि कुछ विमानों के ईंधन नियंत्रण स्विच में एक लॉकिंग फीचर होता है, जो समय के साथ ढीला या निष्क्रिय हो सकता है। हालांकि यह एक सामान्य चेतावनी थी, इसलिए इसे कानूनी बाध्यता नहीं माना गया और विमान को ‘असुरक्षित’ भी घोषित नहीं किया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि एयरलाइंस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

कानूनी बाध्यता नहीं थी, लेकिन क्या सावधानी जरूरी नहीं थी?

विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही FAA की यह चेतावनी कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं थी, लेकिन एक अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त संस्था द्वारा जारी की गई सलाह को नजरअंदाज करना लापरवाही ही कही जाएगी। यदि एयर इंडिया ने अपने विमानों में इस विशेष स्विच की जाँच की होती या सुधारात्मक कार्रवाई की होती, तो शायद 12 जून की भयावह दुर्घटना से बचा जा सकता था।

बोइंग 737 का स्विच डिज़ाइन बोइंग 787-8 में भी इस्तेमाल हुआ

गौर करने वाली बात यह भी है कि FAA द्वारा चिन्हित बोइंग 737 जेट में जिस स्विच डिजाइन की खामी की बात कही गई थी, वही डिजाइन बोइंग 787-8 जेट में भी इस्तेमाल किया गया। और यही मॉडल 12 जून को अहमदाबाद में हादसे का शिकार हुआ। FAA ने प्रस्ताव दिया था कि इस स्विच की व्यापक जांच की जाए, लेकिन एयर इंडिया ने उस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

स्विच का नियंत्रण पायलट के हाथ में होता

सामान्य तौर पर पायलट उड़ान भरने और उतरने के दौरान ईंधन स्विच का इस्तेमाल करते हैं। इसके जरिए इंजन तक ईंधन पहुंचता है और किसी भी आपात स्थिति में पायलट स्विच को नियंत्रित कर ईंधन आपूर्ति को रोक या चालू कर सकते हैं। लेकिन इस दुर्घटना में ऐसा कोई आपातकालीन कारण नहीं था कि पायलट को ईंधन स्विच बंद करना पड़े। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में, जब विमान ने बस उड़ान ही भरी हो, पायलट से गलती से स्विच बंद कर देना असंभव-सा लगता है।

उड़ान के कुछ सेकंड बाद दोनों इंजन फेल

जांच में यह सामने आया है कि विमान के टेक-ऑफ के कुछ ही क्षण बाद इंजन अचानक बंद हो गए। रेकॉर्डिंग से यह जानकारी मिली कि एक पायलट ने दूसरे से पूछा – “तुमने ईंधन क्यों बंद किया?” दूसरे पायलट का जवाब था – “मैंने कुछ भी बंद नहीं किया।” इससे संकेत मिलता है कि ईंधन स्विच संभवतः अपने आप ‘कटऑफ़’ मोड में चला गया, या वह ठीक से लॉक नहीं था। दोनों पायलटों ने तुरंत उसे ‘रन’ मोड में वापस किया और इंजन चालू करने की पूरी कोशिश की। इंजन-2 ने थोड़ी देर के लिए प्रतिक्रिया दी, लेकिन इंजन-1 दोबारा शुरू नहीं हो सका।

हादसे में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री सहित 260 लोगों की मौत

इस भयावह दुर्घटना में 242 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों सहित कुल 260 लोगों की मौत हो गई। विमान में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी सवार थे। चमत्कारिक रूप से सिर्फ एक यात्री जीवित बच पाया। यह दुर्घटना भारतीय विमानन इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक बन गई है।

एयर इंडिया द्वारा FAA की चेतावनी को नजरअंदाज करना अब गंभीर आलोचना का कारण बन रहा है। अगर ईंधन स्विच की खामी को समय रहते ठीक किया गया होता, तो सैकड़ों ज़िंदगियाँ बच सकती थीं। यह हादसा केवल तकनीकी चूक नहीं, बल्कि संस्थागत लापरवाही का प्रतीक बन चुका है। अब जब प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आ चुकी है, तो यह जरूरी है कि जिम्मेदारियों को तय किया जाए और भविष्य में इस तरह की लापरवाही को रोका जाए। एयर इंडिया, बोइंग और विमानन नियामकों के लिए यह एक चेतावनी है कि किसी भी सलाह या संकेत को हल्के में लेना जानलेवा साबित हो सकता है।

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