Rohith Vemula case : तेलंगाना सरकार ने हैदराबाद विश्वविद्यालय के दिवंगत शोध छात्र रोहित वेमुला की रहस्यमयी मौत की जांच फिर से शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। राज्य के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क ने शुक्रवार को साफ किया कि कांग्रेस सरकार इस मामले को दोबारा खोलना चाहती है और इसके लिए उच्च न्यायालय में एक अर्जी दाखिल की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध रही है, उन्हें किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
तीन महीने पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को एक पत्र लिखकर रोहित वेमुला के नाम पर एक जाति-भेदभाव विरोधी कानून लाने की मांग की थी। इसी के बाद तेलंगाना सरकार इस दिशा में गंभीर नजर आने लगी है। सरकार अब इस पूरे प्रकरण को केवल एक आत्महत्या के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय के रूप में देख रही है और उस पर संवेदनशीलता के साथ कदम उठा रही है।
17 जनवरी, 2016 को हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्रावास से पीएचडी शोध छात्र रोहित वेमुला का शव मिला था। पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया, लेकिन इसके पीछे की परिस्थितियों ने कई सवाल खड़े किए। घटना से ठीक बारह दिन पहले रोहित और उनके चार साथियों को छात्रावास से निकाल दिया गया था। कहा गया कि इस फैसले के पीछे राजनीतिक दबाव था। रोहित की मौत के बाद पूरे देश में व्यापक आंदोलन हुए और यह मामला दलित उत्पीड़न का प्रतीक बन गया।
रोहित वेमुला की मौत के बाद यह आरोप बार-बार लगाया गया कि वह जातिगत भेदभाव का शिकार हुए थे। विश्वविद्यालय प्रशासन पर यह भी आरोप लगा कि उसने भाजपा नेताओं के दबाव में रोहित और उनके साथियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की। यह सवाल आज भी अनुत्तरित हैं कि क्या एक होनहार दलित छात्र को केवल उसकी जाति के कारण ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा कि उसे अपनी जान गंवानी पड़ी?
मई 2024 में इस मामले को लेकर एक बड़ा मोड़ आया, जब पुलिस ने रोहित की मौत की जांच बंद करते हुए रिपोर्ट में कहा कि वह दलित नहीं थे और उनका जाति प्रमाणपत्र फर्जी था। पुलिस का दावा था कि प्रमाणपत्र के फर्जी होने के खुलासे के डर से रोहित ने आत्महत्या की। इसी आधार पर भाजपा नेताओं और विश्वविद्यालय के अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी गई। इस निष्कर्ष पर भी देशभर में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी।
अब तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने इस फाइल को फिर से खोलने का निर्णय लिया है और उच्च न्यायालय में पुनः जांच के लिए आवेदन दिया गया है। उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि यह केवल एक छात्र की मौत का मामला नहीं है, बल्कि यह न्याय और सामाजिक समानता की लड़ाई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन लोगों ने रोहित के खिलाफ साजिश की, उन्हें बाद में पुरस्कृत किया गया।
भट्टी विक्रमार्क ने पूर्व एमएलसी रामचंद्र राव पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों पर मुकदमा दर्ज कराने का दबाव बनाया और अब उन्हें भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया है। वहीं, मामले के मुख्य आरोपी माने जाने वाले सुशील कुमार को दिल्ली विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर नियुक्त कर दिया गया है। यह घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि आरोपियों को संरक्षण मिला।
तेलंगाना में कांग्रेस सरकार रोहित वेमुला की मौत को एक सामाजिक न्याय के बड़े मुद्दे के तौर पर देख रही है। जहां पहले मामले को बंद कर दिया गया था, अब दोबारा जांच और एक संभावित जाति-भेदभाव विरोधी कानून की बात से उम्मीद जगी है कि रोहित और जैसे हजारों छात्रों को न्याय मिलेगा। आने वाले समय में यह मामला सिर्फ एक राज्य का नहीं, बल्कि पूरे देश में शिक्षा संस्थानों में जातिगत समानता की दिशा में एक बड़ी बहस बन सकता है।
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