PM Modi in Knesset
PM Modi in Knesset: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय ऐतिहासिक इजराइल दौरे पर हैं। इस यात्रा के दौरान उन्होंने इजराइली संसद ‘नेसेट’ को संबोधित किया, जहाँ उनका अभूतपूर्व स्वागत हुआ। जैसे ही पीएम मोदी सदन में पहुँचे, सभी सांसदों ने खड़े होकर करतल ध्वनि से उनका अभिनंदन किया और पूरा सदन ‘मोदी-मोदी’ के नारों से गूंज उठा। गौरतलब है कि नेसेट को संबोधित करने वाले वे भारत के पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं। अपने संबोधन की शुरुआत में उन्होंने इसे 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान बताते हुए कहा कि वह एक प्राचीन सभ्यता के प्रतिनिधि के रूप में दूसरी महान सभ्यता को मित्रता और साझेदारी का संदेश देने आए हैं।
पीएम मोदी ने अपने भाषण के दौरान इजराइल पर हुए हमास के आतंकी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने वैश्विक समुदाय को संदेश देते हुए कहा कि किसी भी कारण से निर्दोष नागरिकों की हत्या को सही नहीं ठहराया जा सकता। मोदी ने भावुक होते हुए कहा, “भारत दशकों से आतंकवाद का दंश झेल रहा है, इसलिए हम आपके दर्द को बखूबी समझते हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को किसी भी आधार पर जायज नहीं ठहराया जा सकता और भारत इस चुनौतीपूर्ण समय में पूरी मजबूती के साथ इजराइल के साथ खड़ा है।
पीएम मोदी के संबोधन से पहले इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें ‘ग्रेट फ्रेंड’ और ‘भाई’ कहकर संबोधित किया। नेतन्याहू ने कहा कि उनके दिल में मोदी के लिए एक विशेष स्थान है और वे दुनिया के सबसे सम्मानित नेताओं में से एक हैं। इससे पहले जब पीएम मोदी तेल अवीव पहुँचे, तब स्वयं नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा नेतन्याहू ने प्रोटोकॉल तोड़कर एयरपोर्ट पर उनकी अगवानी की। वहां उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया और दोनों देशों के राष्ट्रगान की धुन के साथ भव्य स्वागत किया गया।
आतंकवाद पर सख्त रुख अपनाने के साथ-साथ प्रधानमंत्री ने मानवीय संवेदनाओं को भी प्रमुखता दी। उन्होंने कहा कि भारत ‘गाजा पीस इनिशिएटिव’ का पूर्ण समर्थन करता है। पीएम मोदी के अनुसार, यह पहल क्षेत्र में न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की नई उम्मीद जगाती है। उन्होंने संदेश दिया कि भारत विकास और शांति का पक्षधर है और वह क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में एक बेहद दिलचस्प और ऐतिहासिक तथ्य का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जिस दिन उनका जन्म हुआ था, ठीक उसी दिन भारत ने आधिकारिक रूप से इजराइल को एक राष्ट्र के रूप में मान्यता दी थी। इस सुखद संयोग को उन्होंने दोनों देशों के नियति से जुड़े होने का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि भारत और इजराइल की साझेदारी केवल रणनीतिक नहीं है, बल्कि यह दो प्राचीन संस्कृतियों का मेल है जो आधुनिक विश्व के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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