India US Trade Deal
India US Trade Deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में दिए गए साक्षात्कार के बाद देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया है। कांग्रेस के संचार विभाग के महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री भली-भांति जानते हैं कि साल 2026 का केंद्रीय बजट देश की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने में पूरी तरह विफल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बजट में सरकार की नीतियों में स्पष्ट रूप से ‘थकान’ और ‘दृष्टिकोण की कमी’ दिखाई देती है। कांग्रेस के अनुसार, सरकार के पास देश की आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए अब कोई नया विचार शेष नहीं रह गया है।
जयराम रमेश ने तर्क दिया कि केंद्रीय बजट 2026 को बाजारों ने पूरी तरह से नकार दिया है। उन्होंने दावा किया कि निवेशकों और शेयर बाजार ने बजट के प्रति नकारात्मक रुख दिखाया है, जिससे सरकार की आर्थिक साख को धक्का लगा है। इसी नकारात्मक प्रतिक्रिया और निवेशकों के टूटते भरोसे को बचाने के लिए प्रधानमंत्री को बजट पेश होने के लगभग दो सप्ताह बाद न्यूज़ एजेंसी पीटीआई (PTI) को इंटरव्यू देना पड़ा। कांग्रेस का मानना है कि संसद में विपक्ष द्वारा की गई कड़ी आलोचना और जनता के बीच बढ़ते असंतोष को दबाने के लिए प्रधानमंत्री ने बचाव की मुद्रा अपनाई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने साक्षात्कार में भारत और अमेरिका के बीच हालिया ट्रेड डील (व्यापार समझौते) को देश की अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर बताया था। इस पर पलटवार करते हुए जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री का पूरा बयान हमेशा की तरह केवल “प्रभावशाली दिखने वाले वन-लाइनर” और जुमलों तक ही सीमित है। उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत इन बड़े दावों से कोसों दूर है। विपक्षी दल का आरोप है कि अमेरिका के साथ हुए इस समझौते में भारतीय किसानों और छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा करने के बजाय केवल सुर्खियां बटोरने पर ध्यान दिया गया है, जिसका वास्तविकता से कोई सीधा संबंध नहीं है।
कांग्रेस ने सरकार पर आर्थिक कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि बजट 2026 न केवल महंगाई को नियंत्रित करने में असफल रहा है, बल्कि रोजगार सृजन की दिशा में भी इसमें कोई ठोस रोडमैप नहीं है। जयराम रमेश के अनुसार, प्रधानमंत्री का इंटरव्यू यह स्पष्ट करता है कि सरकार अब केवल डैमेज कंट्रोल में जुटी हुई है। कांग्रेस का कहना है कि बजट के बाद बाजारों में आई गिरावट और विपक्षी दलों की ओर से उठाए गए तकनीकी सवालों का प्रधानमंत्री के पास कोई सीधा जवाब नहीं है, इसलिए वे केवल काल्पनिक लक्ष्यों और भविष्य के सुनहरे सपनों की बात कर रहे हैं।
15 फरवरी 2026 को दिए गए प्रधानमंत्री के इस इंटरव्यू ने देश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां एक तरफ भाजपा इसे ‘विकसित भारत’ की ओर बढ़ता कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे ‘आर्थिक आपदा’ का दस्तावेज करार दे रही है। जयराम रमेश के बयानों से यह स्पष्ट है कि आगामी दिनों में संसद से लेकर सड़क तक बजट और अमेरिकी ट्रेड डील को लेकर हंगामा और तेज होगा। विपक्षी दल अब सरकार से व्यापार समझौते की बारीकियों और बजट के प्रावधानों पर स्पष्ट जवाब की मांग कर रहा है।
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