Manipur: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आखिरकार 864 दिनों यानी 28 महीनों बाद मणिपुर पहुंचे, लेकिन जिस उम्मीद के साथ वहां की जनता ने उन्हें देखा, वह पूरी नहीं हो सकी। जातीय हिंसा से जूझ रहे मणिपुर में मोदी का यह दौरा प्रतीकात्मक से ज्यादा नहीं लगा, क्योंकि उनके भाषण में शांति और समाधान से ज्यादा ज़ोर ‘विकास’ पर था। शायद यही कारण रहा कि कंगला फोर्ट, इम्फाल में आयोजित रैली में मौजूद विश्वविद्यालय के छात्र, सरकारी कर्मचारी, रिटायर्ड शिक्षक और यहां तक कि बीजेपी समर्थक भी मायूस दिखे।

क्या बोले प्रधानमंत्री?
प्रधानमंत्री ने अपने 23 मिनट के भाषण में मणिपुर में हुई हिंसा को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए कहा, “यह हमारे पूर्वजों और आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय है।” उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार मणिपुर में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

पीएम मोदी ने ₹3,000 करोड़ के विशेष पैकेज की घोषणा की, जिसमें से ₹500 करोड़ विस्थापितों के लिए हैं। उन्होंने दावा किया कि “एक नया सवेरा मणिपुर के लिए इंतजार कर रहा है।”
सवालों के जवाब नहीं मिले
पीएम मोदी के भाषण में जिन बातों की कमी महसूस की गई, वे थीं—दोनों समुदायों (मैतेई और कुकी-जो) के बीच सुलह का कोई स्पष्ट खाका, आईडीपी (आंतरिक रूप से विस्थापित) लोगों की पुनर्वास नीति, और राज्य में निर्भय आवाजाही की व्यवस्था।
इम्फाल निवासी राबिसना थियाम, जो मणिपुर यूनिवर्सिटी की छात्रा हैं, ने कहा:“हम इस राज्य में कैदियों जैसे हैं। प्रधानमंत्री से उम्मीद थी कि वह हमारी समस्याओं को संबोधित करेंगे, लेकिन उन्होंने मणिपुर की हिंसा पर सिर्फ सतही बात की।”
बिष्णुपुर जिले से आए एक सेवानिवृत्त शिक्षक एम. सनाथोई सिंह ने कहा:”हम यह सुनने आए थे कि शांति कैसे लौटेगी, लेकिन उन्होंने सिर्फ विकास की बात की, जो सरकार की सामान्य ज़िम्मेदारी है।”
क्या बोले राजनीतिक दल?
कांग्रेस सांसद अ. बिमोल अकोइजम ने कहा कि पीएम मोदी ने आज भी मणिपुर के “अभूतपूर्व संकट” को गंभीरता से नहीं लिया।
कांग्रेस नेता ओ. इबोबी सिंह ने कहा, “यह भाषण बेहद सामान्य था, जबकि मणिपुर को एक ठोस योजना की ज़रूरत थी।”
यहां तक कि बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने भी नाम न छापने की शर्त पर कहा कि भाषण उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा।
क्या बोले कुकी-जो समुदाय?
कुकी-जो काउंसिल (Kuki-Zo Council – KZC) ने प्रधानमंत्री के चुराचांदपुर दौरे का स्वागत किया, लेकिन साथ ही अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग दोहराई एक अलग केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory) जिसमें अलग विधानमंडल हो। उन्होंने पीएम को एक ज्ञापन सौंपा जिसमें कहा गया कि यही मणिपुर संकट का स्थायी समाधान हो सकता है।
मणिपुर के लोगों की मुख्य चिंताएं
क्या मैतेई और कुकी समुदाय एक बार फिर साथ रह पाएंगे?
क्या लोग पूरे राज्य में बिना डर के घूम पाएंगे?
क्या सरकार पहाड़ों और घाटी के बीच मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करेगी?
अब भी राहत शिविरों में रह रहे लोगों को कब पुनर्वास मिलेगा?
यात्रा और विरोध
पीएम मोदी मिजोरम से इम्फाल पहुंचे, फिर सड़क मार्ग से 60 किलोमीटर दूर चुराचांदपुर गए, जहां उन्होंने ₹7,300 करोड़ की विकास परियोजनाओं की नींव रखी। हालांकि, उनकी यात्रा को लेकर कोरकॉम (Corcom) नामक संगठन ने बंद बुलाया था और AMUCO जैसे सिविल सोसाइटी ग्रुप्स ने भी देरी से हुई यात्रा पर नाराजगी जताई।
‘विकास’ से नहीं, ‘समझौते’ से लौटेगी शांति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा प्रतीकात्मक रहा, लेकिन मणिपुर की जनता को अब प्रतीकों की नहीं, समाधान की ज़रूरत है। विकास की योजनाएं तभी कारगर होंगी जब राज्य में शांति होगी। लोगों की सबसे बड़ी मांग है कि सरकार एक समयबद्ध ‘शांति रोडमैप’ पेश करे, जिसमें समझौते, पुनर्वास और भरोसे को प्राथमिकता दी जाए।
Read More: नेशनल लोक अदालत : 5 माह में 57 लाख के मुआवजे पर राजीनामा, हजारों मामलों का निपटारा











