PM Modi Mann Ki Baat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। हर महीने के अंतिम रविवार को प्रसारित होने वाले इस कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने 27वें कारगिल विजय दिवस के अवसर पर देश के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की। प्रधानमंत्री ने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि भारतीय सेना के अदम्य साहस, शौर्य और बलिदान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह दिन हर भारतीय को गर्व की अनुभूति कराता है और देश के जवानों की वीरता को हमेशा याद रखने की प्रेरणा देता है। उन्होंने इस अवसर पर आयोजित विशेष शौर्य यात्रा का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यह अभियान देशवासियों में राष्ट्रभक्ति की भावना को और मजबूत करता है।

कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों के साहस को किया नमन
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों ने बेहद कठिन परिस्थितियों में दुश्मनों का सामना किया। ऊंची बर्फीली चोटियां, प्रतिकूल मौसम और लगातार चुनौतियों के बावजूद सैनिकों ने अपने अदम्य साहस और संकल्प के दम पर भारत की सीमाओं की रक्षा की। उन्होंने कहा कि सैनिकों ने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया और उनके त्याग को देश कभी नहीं भूल सकता। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का दिन प्रत्येक नागरिक को उन वीर शहीदों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

विक्रम-1 रॉकेट की सफलता पर जताया गर्व
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की ऐतिहासिक उपलब्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने निजी स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित विक्रम-1 रॉकेट के सफल प्रक्षेपण को देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि है और इससे यह साबित होता है कि भारतीय युवा नवाचार, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं ने अपनी प्रतिभा, मेहनत और धैर्य के दम पर वह कर दिखाया है, जिसकी कभी केवल कल्पना की जाती थी।
जल संरक्षण और रक्षा क्षेत्र की उपलब्धियों का किया उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने देशभर में चल रहे ‘कैच द रेन’ अभियान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि गांवों से लेकर शहरों तक लोगों ने वर्षा जल संरक्षण के इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाई है। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय नौसेना में शामिल हुए स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस महेंद्रगिरि का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हाल ही में डीआरडीओ ने पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट और कुशा मिसाइल का सफल परीक्षण किया है, जो देश की रक्षा क्षमता को और मजबूत बनाता है।
रक्षा निर्यात और वैश्विक सहयोग पर भारत की बढ़ती ताकत
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात दोनों क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि हाल ही में इंडोनेशिया यात्रा के दौरान ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल से जुड़े महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। उन्होंने कहा कि भारतीय रक्षा तकनीक और स्वदेशी हथियारों पर दुनिया का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में हो रही प्रगति भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला रही है।
खेलों में बेटियों की उपलब्धियों की सराहना
प्रधानमंत्री मोदी ने खेल जगत में भारतीय खिलाड़ियों, विशेषकर महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पीवी सिंधु जापान ओपन बैडमिंटन का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी हैं, जो पूरे देश के लिए गर्व की बात है। इसके अलावा भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने लंदन के ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर अपना पहला टेस्ट मैच जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने कहा कि देश की बेटियां लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का नाम रोशन कर रही हैं और युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
संस्कृत और पारंपरिक कला संरक्षण की पहल का जिक्र
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने केरल के एर्नाकुलम स्थित एक विद्यालय के संस्कृत क्लब का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वहां शिक्षक अभिनव तरीके से फुटबॉल जैसे खेलों के माध्यम से संस्कृत भाषा को लोकप्रिय बना रहे हैं। इस पहल को ‘अक्षरकंदुक’ नाम दिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने कश्मीर की पारंपरिक ‘वगू’ चटाई के संरक्षण के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि स्थानीय कारीगर और युवा इस पारंपरिक शिल्प को नई पहचान देने का काम कर रहे हैं, जिससे भारत की सांस्कृतिक विरासत भी मजबूत हो रही है।
विकास, नवाचार और राष्ट्रनिर्माण का दिया संदेश
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत विज्ञान, रक्षा, खेल, संस्कृति और नवाचार जैसे हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने देशवासियों से इन सकारात्मक प्रयासों में सहभागी बनने की अपील की और कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही विकसित भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने एक बार फिर कारगिल के अमर शहीदों को नमन करते हुए देश की एकता, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश दिया।
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