SCO Summit 2025 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 अगस्त से 1 सितंबर तक जापान और चीन की महत्वपूर्ण विदेश यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान वह जापान में 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन और चीन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 25वीं शिखर बैठक में हिस्सा लेंगे। इस बहुप्रतीक्षित दौरे को क्षेत्रीय कूटनीति और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।

जापान में भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन
प्रधानमंत्री मोदी 29-30 अगस्त को जापान की राजधानी टोक्यो में होंगे, जहां वह जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। विदेश सचिव विक्रम मिस्री के अनुसार, यह 15वां वार्षिक शिखर सम्मेलन दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, टेक्नोलॉजी और निवेश जैसे मुद्दों पर सहयोग को और मजबूत करने का अवसर होगा। भारत और जापान के संबंध बीते कुछ वर्षों में रणनीतिक साझेदारी में तब्दील हो चुके हैं, और इस यात्रा से दोनों देशों के संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

चीन में SCO शिखर सम्मेलन
जापान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी चीन के गुआंगझोउ शहर पहुंचेंगे, जहां 31 अगस्त को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 25वीं शिखर बैठक आयोजित की जाएगी। इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ-साथ मध्य एशिया, दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और दक्षिण पूर्व एशिया के कई शीर्ष नेता भाग लेंगे।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सम्मेलन से पहले एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि “रूस और चीन के संबंध दुनिया में सबसे अधिक स्थिर हैं।” उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि वह व्यक्तिगत रूप से पीएम मोदी और पुतिन का स्वागत करेंगे। इस बयान को रूस-चीन घनिष्ठ संबंधों की पुष्टि के रूप में देखा जा रहा है।
वैश्विक कूटनीति में भारत की भूमिका
पिछले साल रूस में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी ने पुतिन और जिनपिंग के साथ मंच साझा किया था। ऐसे में मौजूदा SCO बैठक वैश्विक भू-राजनीति के परिप्रेक्ष्य में भारत की स्थिति को और मजबूत कर सकती है। भारत, जो अब एक उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में देखा जा रहा है, क्षेत्रीय स्थिरता और विकास में अहम भूमिका निभा रहा है।
पीएम मोदी का यह दोहरा दौरा पहले जापान और फिर चीन भारत की विदेश नीति की बहुपक्षीय और संतुलित रणनीति को दर्शाता है। जहां जापान के साथ मजबूत आर्थिक और सुरक्षा साझेदारी को आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा, वहीं चीन में होने वाले SCO शिखर सम्मेलन से क्षेत्रीय सहयोग और बहुपक्षीय संवाद को मजबूती मिलेगी। इस दौरे की सफलता से भारत की वैश्विक छवि और रणनीतिक स्थिति को निश्चित रूप से बल मिलेगा।
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