PoJK Protest : पीओजेके में पाकिस्तान विरोध तेज, JAAC नेता ने भारत से मांगा समर्थन, बढ़ा राजनीतिक दबाव

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओजेके) में विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होते जा रहे हैं। JAAC नेता ने भारत से खुलकर समर्थन की अपील करते हुए दावा किया कि क्षेत्र में अत्याचार चरम पर पहुंच चुका है। आखिर विरोध की असली वजह क्या है और इसका क्षेत्रीय राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है, जानिए पूरी रिपोर्ट।

PoJK Protest : पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में स्थानीय जनता और प्रशासन के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच चुका है। इस्लामाबाद के दमनकारी रवैये और बुनियादी अधिकारों के हनन के खिलाफ स्थानीय लोगों का आक्रोश फूट पड़ा है। पिछले एक महीने से अधिक समय से PoJK में हो रहे विरोध प्रदर्शन अब एक निर्णायक मोड़ पर हैं। इस क्षेत्र में चल रहे आंदोलनों का नेतृत्व कर रही ‘जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ अपने संघर्ष को तेज कर दिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, कमेटी के वरिष्ठ नेता सरदार अमन खान ने स्थानीय जनता से 5 जुलाई को आयोजित विरोध प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में भाग लेने और एकजुटता दिखाने की भावुक अपील की है।

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सरदार अमन खान की अपील: एक वैश्विक संदेश

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो संदेश में सरदार अमन खान ने PoJK की दयनीय स्थिति का खाका खींचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सरकार ने पिछले करीब एक महीने से यहां के निवासियों पर अत्याचार की पराकाष्ठा पार कर दी है। अपने बुनियादी अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले नागरिकों को बलपूर्वक दबाया जा रहा है और सैन्य कार्रवाई का सहारा लिया जा रहा है। सरदार खान ने न केवल PoJK के निवासियों को, बल्कि पुंछ, मेंढर, राजौरी, जम्मू, कश्मीर घाटी, लद्दाख और कारगिल सहित पड़ोसी क्षेत्रों के लोगों से भी इस लड़ाई में नैतिक समर्थन देने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि यह केवल एक क्षेत्र का संघर्ष नहीं, बल्कि मानवाधिकारों के संरक्षण की लड़ाई है।

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खाद्य और दवाइयों की किल्लत से जूझती जनता

प्रदर्शनों के बीच सबसे बड़ी चिंता का विषय मानवीय संकट है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान प्रशासन ने विरोध को कुचलने के लिए क्षेत्र में नाकेबंदी जैसी स्थिति पैदा कर दी है। सरदार अमन खान ने दावा किया कि क्षेत्र में खाद्य आपूर्ति के सभी मुख्य रास्ते बंद कर दिए गए हैं, जिससे जनता के सामने भुखमरी का खतरा मंडरा रहा है। इतना ही नहीं, जीवन रक्षक दवाइयों की आपूर्ति भी पूरी तरह ठप कर दी गई है। आवाजाही पर कड़ी पाबंदियां लगाकर लोगों के सामान्य जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया गया है। जेएएसी का कहना है कि प्रशासन का यह कदम नागरिकों को घुटनों पर लाने का एक अमानवीय तरीका है।

दमनकारी नीतियां और लोकतंत्र पर प्रहार

जेएएसी ने पाकिस्तान प्रशासन पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के दमन का गंभीर आरोप लगाया है। कमेटी का आरोप है कि लोकतंत्र की दुहाई देने वाला पाकिस्तान, PoJK में राजनीतिक विरोध को कुचलने के लिए हरसंभव हथकंडे अपना रहा है। कार्यकर्ताओं की बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां, उन पर फर्जी मामले दर्ज करना और इंटरनेट पर रोक लगाना सामान्य बात हो गई है। 30 जून को हुई एक घटना का जिक्र करते हुए संगठन ने बताया कि किस तरह विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को PoJK में प्रवेश करने से रोक दिया गया। यह घटना स्पष्ट करती है कि क्षेत्र में लोकतांत्रिक आवाजों के लिए कोई जगह नहीं बची है और प्रशासन किसी भी बाहरी समर्थन या राजनीतिक संवाद को बर्दाश्त नहीं कर रहा है। PoJK की जनता अब अपने अस्तित्व और सम्मान के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर है।

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