PoK Violence: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में पिछले दो महीनों से जारी विरोध प्रदर्शनों और बढ़ते जनआक्रोश के बीच पाकिस्तान सरकार दबाव में नजर आ रही है। चुनाव में कथित धांधली, महंगाई, बिजली की ऊंची दरों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर क्षेत्र में लगातार असंतोष सामने आया है। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों ने भी हालात को गंभीर बना दिया है। इसी पृष्ठभूमि में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि क्षेत्र की शिकायतों और समस्याओं का समाधान सैन्य कार्रवाई या टकराव से नहीं, बल्कि बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए।

शहबाज शरीफ ने बातचीत को बताया समाधान का रास्ता
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का बयान ऐसे समय आया है, जब उनकी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज यानी PML-N PoK विधानसभा के तीन चरणों में हुए विवादित चुनावों में बहुमत की ओर बढ़ रही है। शरीफ ने संकेत दिया कि नई सरकार बनने के बाद क्षेत्र में जारी असंतोष को बातचीत के माध्यम से दूर करने की कोशिश की जाएगी। उनका कहना है कि जनता की शिकायतों को समझना और उनका राजनीतिक समाधान तलाशना जरूरी है।

प्रदर्शनकारियों और उपद्रवियों के बीच अंतर की कोशिश
प्रधानमंत्री शरीफ ने अपने रुख में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों और हिंसा या अराजकता फैलाने वालों के बीच स्पष्ट अंतर करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रखने वाले लोगों की शिकायतों पर बातचीत होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि हिंसा, अव्यवस्था और अराजकता फैलाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार का संदेश है कि बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा।
JAAC से बातचीत के संकेत
शहबाज शरीफ के रुख से संकेत मिल रहे हैं कि आने वाली सरकार प्रतिबंधित संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी यानी JAAC और आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ बातचीत आगे बढ़ा सकती है। JAAC लंबे समय से क्षेत्र की राजनीतिक, आर्थिक और प्रशासनिक समस्याओं को लेकर आवाज उठाती रही है। सरकार की ओर से वार्ता की संभावना सामने आने के बाद प्रदर्शनकारियों की मांगों पर बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की उम्मीद बढ़ी है।
राणा सनाउल्लाह ने प्रदर्शनकारियों को बताया देशभक्त
प्रधानमंत्री के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने भी प्रदर्शनकारियों को लेकर अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि JAAC से जुड़े अधिकांश लोग उनके अपने भाई हैं और उन्हें देशभक्त माना जाना चाहिए। सनाउल्लाह के मुताबिक, अगर नई सरकार को दो-तिहाई बहुमत हासिल होता है तो उसका पहला काम प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत शुरू करना होगा। उनके बयान से सरकार के भीतर संवाद के पक्ष में बढ़ती सहमति के संकेत मिले हैं।

आरक्षित 12 सीटों को लेकर सबसे बड़ा विवाद
PoK में जारी असंतोष के प्रमुख मुद्दों में विधानसभा की 12 आरक्षित शरणार्थी सीटें भी शामिल हैं। JAAC का आरोप है कि पाकिस्तान में रहने वाले शरणार्थियों के लिए निर्धारित इन सीटों का इस्तेमाल क्षेत्र की राजनीतिक व्यवस्था को प्रभावित करने के लिए किया जाता है। संगठन का दावा है कि इन सीटों के जरिए पाकिस्तानी प्रतिष्ठान अपने अनुकूल सरकार बनाने की कोशिश करता है। इसी मुद्दे को लेकर राजनीतिक संगठनों और स्थानीय लोगों में लंबे समय से नाराजगी है।
महंगाई और बिजली के बिलों से जनता परेशान
क्षेत्र में आर्थिक परेशानियां भी आंदोलन की प्रमुख वजहों में शामिल हैं। गेहूं की सब्सिडी खत्म होने, बिजली की बढ़ती दरों और महंगाई ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि PoK के प्राकृतिक संसाधनों और बिजली उत्पादन का पर्याप्त लाभ स्थानीय आबादी को नहीं मिल रहा है। रोजगार के सीमित अवसर और आर्थिक बदहाली के बीच बढ़ते खर्च ने जनता के असंतोष को और गहरा कर दिया है।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर उठे सवाल
विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। नागरिक संगठनों का दावा है कि प्रदर्शन और चुनाव से जुड़ी हिंसा में कई लोगों की मौत हुई तथा बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनके खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया। हालांकि, पाकिस्तान सरकार इन आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताते हुए आरोपों पर सवाल उठाती रही है।
चुनावी धांधली के आरोपों ने बढ़ाया विवाद
PoK विधानसभा चुनाव भी विवादों से घिरे रहे। JAAC और विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया में कथित धांधली, बूथ कैप्चरिंग और राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगाए। इन संगठनों ने चुनावों के बहिष्कार की अपील भी की थी। ऐसे में चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता और नई सरकार की वैधता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विरोध के बीच सरकार के सामने राजनीतिक स्थिरता कायम रखना बड़ी चुनौती बन गया है।
भारत ने पाकिस्तान के चुनावों पर जताया विरोध
PoK में हुए घटनाक्रम को लेकर भारत ने भी कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। भारत ने वहां कराए जा रहे चुनावों को दिखावा बताते हुए कहा है कि ऐसी प्रक्रियाएं क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को नहीं बदल सकतीं। भारत का कहना है कि पाकिस्तानी नियंत्रण वाले क्षेत्र में आम नागरिकों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा से जुड़े सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों पर भारत का रुख
भारत ने PoK में प्रदर्शनकारियों पर कथित कार्रवाई और मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर भी चिंता जताई है। भारतीय पक्ष का कहना है कि राजनीतिक गतिविधियों या चुनावी प्रक्रिया के जरिए वहां की जमीनी वास्तविकता को छिपाया नहीं जा सकता। भारत ने नागरिकों के खिलाफ कथित हिंसा और दमन को लेकर पाकिस्तान पर निशाना साधा है। वहीं, पाकिस्तान इन मुद्दों पर भारत के बयानों को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के तौर पर देखता है।
संवाद से कितना बदलेगा PoK का माहौल
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बातचीत की पेशकश से PoK में जारी असंतोष कितना कम होगा। सरकार अगर प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों पर गंभीरता से चर्चा करती है और आर्थिक तथा राजनीतिक मुद्दों पर ठोस कदम उठाती है, तो तनाव कम होने की संभावना बन सकती है। हालांकि, लंबे समय से चले आ रहे विवादों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर बने अविश्वास के कारण सरकार के लिए भरोसा बहाल करना आसान नहीं होगा।
नई सरकार के सामने बड़ी राजनीतिक चुनौती
PoK में नई सरकार के गठन के साथ पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता और जनता का भरोसा कायम करने की होगी। चुनावी विवाद, आर्थिक संकट और प्रदर्शनकारियों की मांगों के बीच केवल सख्ती से हालात संभालना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में शहबाज शरीफ का संवाद का रास्ता अपनाने का संकेत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब देखना होगा कि सरकार बातचीत को किस स्तर तक ले जाती है और क्या इससे PoK में लंबे समय से जारी असंतोष को शांत किया जा सकेगा।
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