Police Firing Bihar : बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में रविवार शाम उस समय हंगामा और हिंसा भड़क उठी जब उत्पाद विभाग की टीम शराब के खिलाफ छापेमारी करने पहुंची। आरा के शाहपुर वार्ड नंबर-3 इलाके में शराब बिक्री की सूचना पर कार्रवाई की गई थी। लेकिन जैसे ही टीम वहां पहुंची, ग्रामीणों ने विरोध करते हुए ईंट-पत्थर चलाने शुरू कर दिए। इस हमले में विभाग के कुछ कर्मी घायल हो गए।
पथराव और हंगामे के बीच स्थिति बिगड़ती देख उत्पाद विभाग के एक सैप जवान ने आत्मरक्षा में फायरिंग कर दी। इस दौरान दो युवकों को गोली लगी। एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मृतक की पहचान शाहपुर वार्ड नंबर-3 निवासी सुशील यादव के रूप में हुई है, जो जगदीश यादव का बेटा था। वहीं, घायल युवक का नाम उत्तम यादव बताया गया है।
युवक की मौत की खबर फैलते ही इलाके में तनाव फैल गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने उत्पाद विभाग की कार्रवाई को पुलिस की ज्यादती बताया और जवानों पर हत्या का आरोप लगाया। गुस्साए लोगों ने शव को ठेले पर रखकर थाना मोड़ के पास सड़क जाम कर दी और मुआवजा, दोषी जवानों पर कार्रवाई जैसी मांगों को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
उत्पाद विभाग की टीम पर ग्रामीणों द्वारा किए गए पथराव में एक जवान भी घायल हो गया। स्थिति को संभालने के लिए शाहपुर थानाध्यक्ष कुमार रजनीकांत के नेतृत्व में पुलिस की एक टीम घटनास्थल पर पहुंची। इसके बाद एसडीएम संजीत कुमार, एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा और बिहिया इंस्पेक्टर सुभाष प्रसाद भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और हालात पर काबू पाया गया।
घटना के संबंध में भोजपुर के एसपी राज ने जानकारी देते हुए कहा कि “उत्पाद विभाग की टीम शराब के खिलाफ छापेमारी कर रही थी। उस दौरान ग्रामीणों ने विरोध किया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसी दौरान आत्मरक्षा में सैप जवान ने गोली चलाई, जिसमें एक युवक की मौत हो गई।” “शराब तस्करी से जुड़े लोगों ने टीम पर न सिर्फ पथराव किया बल्कि फायरिंग भी की। मजबूरन टीम को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी। मृतक युवक पर पहले से भी आपराधिक मामले दर्ज हैं।”
फायरिंग में युवक की मौत के बाद गांव में देर रात तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। पुलिस को इलाके में कैंप करना पड़ा, ताकि कोई अप्रिय घटना दोबारा न हो। मामले की जांच जारी है और पुलिस अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को समझाकर शांत करने की कोशिश की। हालांकि, ग्रामीण अभी भी घटना को लेकर गुस्से में हैं और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
घटना को लेकर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और पूरी जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया है कि यदि गोली चलाने में कोई लापरवाही पाई जाती है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, मृतक के परिजनों को मुआवजे देने की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है। मामले में आगे की कार्रवाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के आधार पर तय की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर से बिहार में शराबबंदी के तहत चल रही पुलिस कार्रवाई की संवेदनशीलता को उजागर करती है।जहां पुलिस कानून का पालन करवाने के लिए कार्रवाई करती है, वहीं कई बार स्थानीय विरोध हिंसा में बदल जाता है।अब यह देखना अहम होगा कि जांच में क्या सामने आता है – क्या यह पुलिस की गलती थी या आत्मरक्षा की मजबूरी?इस घटना ने भोजपुर जिले में शांति व्यवस्था को चुनौती जरूर दी है और प्रशासन के लिए यह एक गंभीर चेतावनी भी है।
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