Bhooth Bangla
Bhooth Bangla: बॉलीवुड के खिलाड़ी अक्षय कुमार की आगामी फिल्म ‘भूत बंगला’ इन दिनों अपनी अनोखी कास्टिंग को लेकर चर्चा का केंद्र बनी हुई है। फिल्म की घोषणा के बाद से ही सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर बहस छिड़ी हुई है कि आखिर 58 साल के अक्षय कुमार के पिता की भूमिका के लिए 49 वर्षीय अभिनेता जीशू सेनगुप्ता को क्यों चुना गया? यह स्थिति इसलिए भी हैरान करने वाली है क्योंकि असल जिंदगी में जीशू अक्षय कुमार से करीब 9 साल छोटे हैं। सिनेमा के शौकीनों के मन में उठ रहे इन सवालों के बीच, आइए जानते हैं अक्षय के इस ‘युवा’ ऑनस्क्रीन पिता के सफर और इस अजीबोगरीब कास्टिंग के पीछे छिपे असली सच के बारे में।
जीशू सेनगुप्ता, जिनका असली नाम विश्वरूप सेनगुप्ता है, बंगाली फिल्म उद्योग का एक चमकता सितारा हैं। 15 मार्च 1977 को कोलकाता में जन्मे जीशू ने अपने अभिनय सफर की शुरुआत साल 1998 में दूरदर्शन के ऐतिहासिक धारावाहिक ‘महाप्रभु’ से की थी। इस सीरियल में चैतन्य महाप्रभु की भूमिका निभाकर वे रातों-रात बंगाल के हर घर का जाना-पहचाना नाम बन गए। उनकी सादगी और अभिनय की गहराई ने उन्हें बंगाली सिनेमा में पैर जमाने में मदद की, जहाँ उन्होंने ऋतुपर्णो घोष जैसे महान निर्देशकों के साथ काम कर अपनी कला को निखारा।
शायद कम ही लोग जानते होंगे कि जीशू सेनगुप्ता का झुकाव कभी भी अभिनय की तरफ नहीं था। वे वास्तव में एक पेशेवर क्रिकेटर बनना चाहते थे। वे बंगाल की अंडर-19 क्रिकेट टीम का हिस्सा रह चुके हैं और खेल के मैदान पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। आज भी वे खुद को ‘एक्टर बाद में और क्रिकेटर पहले’ कहना पसंद करते हैं। अभिनय के क्षेत्र में आने के बाद भी खेल के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ है। बॉलीवुड में उनकी एंट्री साल 2004 में श्याम बेनेगल की फिल्म ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस: द फॉरगॉटन हीरो’ से हुई थी। इसके बाद उन्होंने ‘बर्फी’, ‘पीकू’, ‘मर्दानी’ और ‘शकुंतला देवी’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय की अमिट छाप छोड़ी।
‘भूत बंगला’ में जीशू ने डॉ. वासुदेव आचार्य का अहम किरदार निभाया है। फिल्म के निर्देशक प्रियदर्शन के मन में इस रोल के लिए जीशू ही पहली पसंद थे। जीशू ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि जब प्रियदर्शन सर फिल्म की पटकथा लिख रहे थे, तो उन्होंने शुरुआती दौर में किरदार का नाम ही ‘जीशू’ रख दिया था। प्रियदर्शन को जीशू की सहजता और स्क्रीन प्रेजेंस पर इतना भरोसा था कि उन्होंने उम्र के फासले को नजरअंदाज करते हुए उन्हें ही साइन किया। समीक्षक इसे ‘एंजॉयबल एब्सर्डिटी’ कह रहे हैं, क्योंकि प्रियदर्शन की फिल्मों का पागलपन और ह्यूमर अक्सर लॉजिक से परे होता है।
अक्षय से 9 साल छोटे एक्टर को उनका पिता बनाने के पीछे एक बहुत ही ठोस तकनीकी वजह है। फिल्म की कहानी केवल वर्तमान में नहीं चलती, बल्कि यह फ्लैशबैक (अतीत) के दृश्यों पर भी आधारित है। कहानी की मांग ऐसी है कि डॉ. वासुदेव आचार्य के किरदार को अतीत के दृश्यों में काफी युवा दिखना जरूरी था। यदि इस रोल के लिए किसी बुजुर्ग अभिनेता को लिया जाता, तो फ्लैशबैक में उन्हें जवान दिखाने के लिए भारी प्रोस्थेटिक्स या वीएफएक्स का सहारा लेना पड़ता, जो बनावटी लग सकता था। जीशू की फिटनेस और उनका ‘एजलेस’ लुक कहानी की दोनों टाइमलाइन (वर्तमान और अतीत) में पूरी तरह फिट बैठता है, जिससे पूरी फिल्म में एक निरंतरता बनी रहती है।
जीशू सेनगुप्ता की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे दिग्गज अभिनेताओं के सामने पूरी सहजता से खड़े रहते हैं। चाहे अमिताभ बच्चन हों या अक्षय कुमार, जीशू अपनी अलग पहचान बना लेते हैं। ‘भूत बंगला’ में अक्षय और जीशू की यह ‘बाप-बेटे’ की जोड़ी भले ही सुनने में अजीब लगे, लेकिन कहानी के ताने-बाने और फ्लैशबैक की जरूरतों ने इसे तार्किक बना दिया है। अब दर्शकों को इंतजार है कि बड़े पर्दे पर यह जुगलबंदी किस तरह का धमाका करती है।
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