Dilip Jaiswal Controversy :बिहार की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। रविवार को पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जन सुराज पार्टी और माता गुजरी मेडिकल कॉलेज, किशनगंज के संस्थापक परिवार ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल पर गंभीर आरोप लगाए। सरदार मोलेश्वर सिंह के पुत्र गुरुदयाल सिंह और पुत्री अमृत कौर ने दावा किया कि जायसवाल ने कॉलेज पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है और उन्हें ट्रस्ट से जबरन बाहर निकाल दिया गया।
संस्थापक परिवार ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई और ईडी से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने साथ ही कहा कि जब तक जांच नहीं होती, दिलीप जायसवाल को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया जाना चाहिए। परिवार का कहना है कि पिछले 25 वर्षों से कॉलेज गैरकानूनी तरीके से संचालित हो रहा है।
जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह मामला सिर्फ ट्रस्ट या कॉलेज की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह कानून की रक्षा करने वालों के ही द्वारा कानून के उल्लंघन की तस्वीर है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब निजी लाभ की बात आती है, तब सभी दल—भाजपा, जदयू और राजद—एक साथ खड़े हो जाते हैं।प्रशांत किशोर ने खुलासा किया कि दिलीप जायसवाल कभी कॉलेज में क्लर्क हुआ करते थे। आज वे न केवल डायरेक्टर बन चुके हैं, बल्कि ट्रस्ट पर पूरा नियंत्रण रखते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जायसवाल ने साजिश के तहत वैध ट्रस्टियों को बाहर कर संस्थापक परिवार को पूरी तरह बेदखल कर दिया।
प्रेस वार्ता में मौजूद वरिष्ठ अधिवक्ता वाईबी गिरी ने कहा कि ट्रस्ट एक्ट के अनुसार सिख अल्पसंख्यक ट्रस्ट में दो-तिहाई सदस्य सिख समुदाय से होने चाहिए, लेकिन इस नियम को दरकिनार कर जायसवाल कॉलेज पर काबिज हैं। उन्होंने कहा कि वे इस मामले को कोर्ट ले जाएंगे और न्याय की लड़ाई लड़ेंगे।
प्रशांत किशोर ने मीडिया को बताया कि जायसवाल पर राजेश शाह की हत्या की साजिश रचने का भी आरोप है, जो कॉलेज से जुड़े हुए थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि जांच करने वाले एसपी ने जायसवाल को क्लीन चिट दी, जबकि उनकी पत्नी ने उसी कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री ली थी, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठता है।
किशोर ने बताया कि यह मामला किसी एक दल का नहीं है। उन्होंने खुलासा किया कि राजद शासन काल में ही जायसवाल ने कॉलेज पर कब्जा किया और राबड़ी देवी ने उन्हें “मुंह बोला भाई” कहा था। आरोप लगाया गया कि पिछले ढाई दशकों में कई नेताओं और अधिकारियों के बच्चों को कॉलेज के मैनेजमेंट कोटे से एमबीबीएस में दाखिला दिलाया गया है, जिससे सभी राजनीतिक दल इस मामले पर चुप हैं।
मेडिकल कॉलेज विवाद से जुड़े इस मामले ने बिहार की राजनीति को एक बार फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप गंभीर हैं और विपक्ष ने इसे कानून व्यवस्था और राजनीतिक मिलीभगत का बड़ा उदाहरण बताया है। अब निगाहें जांच और भाजपा के रुख पर टिकी हैं।
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