Bihar politics: जन सुराज पार्टी के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मचा दी है। उन्होंने राज्य के तीन प्रमुख भाजपा नेताओं—स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, और पूर्व मंत्री दिलीप जायसवाल—पर भ्रष्टाचार, जालसाजी और हत्या जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

“मंगल पांडे के फ्लैट की फंडिंग संदिग्ध”
प्रशांत किशोर ने खुलासा किया कि स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने 86 लाख रुपये में एक फ्लैट खरीदा, जिसमें से 25 लाख रुपये उनकी पत्नी के खाते से दिए गए। उन्होंने दावा किया कि यह राशि पहले दिलीप जायसवाल के खाते से पांडे के पिता के खाते में गई, और वहां से उनकी पत्नी के खाते में ट्रांसफर की गई।

किशोर ने आरोप लगाया कि पांडे ने माना था कि उन्होंने पैसा लिया था, लेकिन बाद में लौटा दिया। इस पर उन्होंने सवाल उठाया—”अगर पैसा लौटा दिया तो फ्लैट की बाकी रकम कहां से आई?” उन्होंने यह भी कहा कि पांडे की पत्नी के खाते में करीब 2.25 करोड़ रुपये जमा किए गए, जिसका ब्यौरा उनके पास है।
“सम्राट चौधरी की डिग्री पर सवाल”
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर हमला बोलते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि 1998 के हलफनामे में उन्होंने खुद को 7वीं पास बताया था, जबकि बाद में वे ग्रेजुएट और पीएचडी होने का दावा करने लगे। किशोर ने सुप्रीम कोर्ट के दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि उस समय उनका नाम सम्राट कुमार मौर्य था और उन्हें परीक्षा में सिर्फ 234 अंक मिले थे, यानी वे फेल हो गए थे। उन्होंने पूछा कि ऐसे में ग्रेजुएशन और पीएचडी की डिग्री कहां से आई?
“दिलीप जायसवाल ने अल्पसंख्यक कॉलेज पर कब्जा किया”
प्रशांत किशोर ने पूर्व मंत्री दिलीप जायसवाल पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सिख समाज के अल्पसंख्यक कॉलेज पर जायसवाल ने कब्जा कर लिया है, जबकि इसका प्रबंधन केवल सिख समुदाय के हाथ में होना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, “जो व्यक्ति कभी क्लर्क या चपरासी था, वह कॉलेज का मालिक कैसे बन गया?”इसके साथ ही किशोर ने जायसवाल पर राजेश शाह नामक व्यक्ति की हत्या में संलिप्तता का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मृतक के परिवार ने खुद इसका दावा किया है।

“जवाब दो या केस करो”
प्रशांत किशोर ने तीनों नेताओं को खुली चुनौती दी—”अगर मेरे आरोप गलत हैं तो ये नेता मीडिया में आकर जवाब दें या मेरे खिलाफ केस दर्ज कराएं।”बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर की यह आक्रामक शैली सत्ता पक्ष के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। उनके आरोप अगर सही साबित होते हैं, तो यह राज्य के राजनीतिक चरित्र पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकते हैं।
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