France Political Crisis: फ्रांस में गहरे राजनीतिक संकट के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने अपने करीबी सहयोगी और केंद्रवादी नेता सेबेस्टियन लेकोर्नू को दोबारा देश का प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। यह निर्णय तब आया है जब लेकोर्नू ने अपने नए बने सरकार के महज 14 घंटे में ही इस्तीफा दे दिया था, जिससे राजनीतिक उथल-पुथल और बढ़ गई थी।

सेबेस्टियन लेकोर्नू ने कहा—“कर्तव्य की भावना से स्वीकार किया पद”
प्रधानमंत्री के रूप में पुनः नियुक्त होने के बाद सेबेस्टियन लेकोर्नू ने कहा, “मैंने यह जिम्मेदारी कर्तव्य की भावना से स्वीकार की है और मैं हर संभव प्रयास करूंगा कि साल के अंत तक फ्रांस के लिए बजट प्रदान किया जा सके और हमारे नागरिकों के दैनिक जीवन की समस्याओं का समाधान हो।” उन्होंने कहा कि राजनीतिक संकट को समाप्त करना बेहद जरूरी है क्योंकि यह जनता को थका चुका है और देश की छवि तथा हितों को नुकसान पहुंचा रहा है।

मैक्रॉन के फैसले का समर्थन
राष्ट्रपति मैक्रॉन के इस असामान्य कदम का समर्थन उनकी पार्टी, सेंटरिस्ट “रेनेसां” के सांसद शैनन सेबान ने किया। उन्होंने कहा कि लेकोर्नू की वापसी से फ्रांस में राजनीतिक स्थिरता बनी रहेगी। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री एलिसाबेथ बॉर्न ने इस फैसले को “फ्रांस के लिए समझौते की दिशा में एक कदम” बताया।
विपक्ष ने जताई असहमति
हालांकि, विपक्षी दलों ने मैक्रॉन के इस निर्णय को सरकार में अन्य राजनीतिक मतों को शामिल न करने के तौर पर देखा है। विपक्ष का मानना है कि यह कदम संसद में विभाजन को और बढ़ाएगा। फ्रांस में राजनीतिक परिदृश्य पहले ही बेहद जटिल है, क्योंकि राष्ट्रपति मैक्रॉन के पास अब केवल 18 महीने शेष हैं।
नई सरकार बनाने का दबाव
सेबेस्टियन लेकोर्नू पर अब यह दबाव है कि वे जल्द से जल्द नई सरकार का गठन करें जिसमें विभिन्न राजनीतिक विचारों का समावेश हो। हालांकि, यह कार्य आसान नहीं है क्योंकि संसद में मतभेद काफी गहरे हैं। साथ ही, जनता भी स्थिरता और सुधार की मांग कर रही है, जिससे सरकार पर जिम्मेदारियां और बढ़ गई हैं।

फ्रांस में राजनीतिक अस्थिरता की पृष्ठभूमि
इस महीने की शुरुआत में ही लेकोर्नू ने अपनी सरकार का गठन किया था, लेकिन संसद में समर्थन न मिलने के कारण वह 14 घंटे में ही अस्तित्व में नहीं रह सकी। इसके बाद से राजनीतिक संकट गहरा गया है और मैक्रॉन को मजबूर होना पड़ा कि वे पुनः लेकोर्नू को मौका दें ताकि वे स्थिति को संभाल सकें।
फ्रांस में वर्तमान राजनीतिक संकट के बीच राष्ट्रपति मैक्रॉन का सेबेस्टियन लेकोर्नू को दोबारा प्रधानमंत्री बनाना स्थिरता लाने की कोशिश है, लेकिन विपक्ष और विभाजित संसद के कारण नए सरकार गठन में चुनौतियां बरकरार हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि फ्रांस की राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक सुधार के लिए यह कदम कितना प्रभावी साबित होता है।











